मुंबई के ऑटो‑टैक्सी चालकों को मराठी सीखना अनिवार्य? सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब
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मुंबई के ऑटो‑टैक्सी चालकों को मराठी भाषा अनिवार्य करने के नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जवाब देने का नोटिस जारी किया है। यह मामला नागरिकों के मौलिक अधिकारों, राज्य की भाषा नीति और मोटर वाहन अधिनियम के बीच के टकराव को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है।
पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2026 से सभी ऑटो‑टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का नियम लागू किया। इस अधिसूचना में कहा गया कि यदि चालक मराठी में संवाद नहीं कर पाए तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस और ऑटो‑परमिट रद्द किया जा सकता है। इस कदम को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें नियम की संवैधानिकता पर सवाल उठाया गया। हाई कोर्ट ने प्रारम्भिक रूप से इस अधिसूचना को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि राज्य ने मराठी सीखने की अवधि एक साल बढ़ा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
हाई कोर्ट के फैसले के बाद, याचिकाकर्ता (एक ऑटो‑टैक्सी चालक) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक शुक्ला और संजय पारिख ने तर्क दिया कि यह अधिसूचना संविधान के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है और मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जज आलोक अराधे की पीठ ने इस याचिका को गंभीरता से लिया और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
मुख्य कानूनी प्रश्न
- क्या भाषा अनिवार्यता नागरिकों के मौलिक अधिकारों (भाषा की स्वतंत्रता, कार्य करने का अधिकार) का उल्लंघन करती है?
- क्या यह नियम मोटर वाहन अधिनियम के तहत जारी किए गए लाइसेंस और परमिट की वैधता को प्रभावित करता है?
- राज्य की भाषा नीति को सार्वजनिक सेवा प्रदान करने वाले पेशेवरों पर लागू करने की सीमा क्या है?
आगामी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की है। इस तिथि तक महाराष्ट्र सरकार को लिखित उत्तर देना अनिवार्य है, जिसमें अधिसूचना के आधार, लागू करने की प्रक्रिया और संभावित अपवादों का विवरण होना चाहिए।
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मुख्य बातें
- महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2026 से ऑटो‑टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का नियम लागू किया।
- हाई कोर्ट ने प्रारम्भिक रूप से अधिसूचना को रद्द कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और मामले को संवैधानिक महत्व दिया।
- मुख्य कानूनी प्रश्नों में मौलिक अधिकार, मोटर वाहन अधिनियम और भाषा नीति की सीमा शामिल हैं।
- अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
यह मामला न केवल मुंबई के ऑटो‑टैक्सी चालकों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत में भाषा नीति और सार्वजनिक सेवाओं के नियमन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यह स्पष्ट होगा कि राज्य की भाषा अनिवार्यताएँ नागरिकों के अधिकारों के साथ कैसे संतुलित की जा सकती हैं।




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