सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को महिला पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का निर्देश
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दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकार रोजी और एसीपी विवेक भगत के बीच हुए विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने पुलिस को रोजी के खिलाफ कोई एक्शन न लेने और एक स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग को स्वीकार किया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की बैंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शामिल हैं, ने दिल्ली पुलिस को यह स्पष्ट किया कि महिला पत्रकार रोजी के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। कोर्ट ने पुलिस को 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों से पहले जारी किए गए BNSS की धारा 163 के आदेश को पेश करने को भी कहा।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद 3 अक्टूबर को उत्पन्न हुआ जब रोजी ने विरोध प्रदर्शन में एक लेफ्ट एक्टिविस्ट को हिरासत में लेने का वीडियो बनाते समय एसीपी विवेक भगत द्वारा कथित तौर पर छेड़छाड़ और धक्का मिलने का आरोप लगाया। एसीपी ने 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में रोजी, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य पाँच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
कानूनी कारवाई और आरोप
एसीपी ने रोजी और अन्य पर SC/ST एक्ट, BNSS की धारा 221, 356(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की। रोजी ने एसीपी पर यौन उत्पीड़न, जाति के आधार पर अपमानजनक टिप्पणी और उनके एसपी पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
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स्वतंत्र जांच समिति की मांग
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अदालत से महिला पत्रकारों के खिलाफ यौन हिंसा और उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की। उन्होंने प्रस्तावित किया कि इस समिति की अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त महिला जज, एक सेवानिवृत्त महिला IPS अधिकारी और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों द्वारा की जाए। CJI सूर्यकांत ने इस प्रस्ताव को प्रथम दृष्टया स्वीकार किया और जयसिंह को प्रभावित पत्रकारों के विवरण और समिति के प्रस्तावित सदस्यों की सूची सीलबंद लिफाफों में जमा करने का निर्देश दिया।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को महिला पत्रकार रोजी के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
- कोर्ट ने BNSS की धारा 163 के आदेश को पेश करने की मांग की।
- इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों के खिलाफ यौन हिंसा की जांच के लिए स्वतंत्र समिति की मांग की, जिसे CJI ने स्वीकार किया।
- एसीपी विवेक भगत ने रोजी और अन्य पर SC/ST एक्ट आदि के तहत FIR दर्ज कराई।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के आदेश का विरोध किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
आगे की कार्यवाही
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों से पहले जारी किए गए BNSS के आदेश को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, स्वतंत्र जांच समिति के गठन के लिए प्रस्तावित नामों और प्रभावित पत्रकारों की सूची सीलबंद लिफाफों में जमा करने की प्रक्रिया अभी जारी है।




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