मेरठ के माता‑पिता पर प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम में मारपीट, लापता बेटे की तलाश में तनाव बढ़ा
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वृंदावन के केलि कुंज आश्रम के बाहर मेरठ के दंपति ने अपने लापता बेटे की वापसी की मांग की, जिससे आश्रम के अनुयायियों के साथ टकराव हुआ और मारपीट की घटना सामने आई। यह मामला 10 मई 2024 को लापता हुए प्रिंस नामक युवक के बाद उत्पन्न हुआ, जो अपने परिवार के साथ आश्रम में आया था।
बेटे की लापता होने की पृष्ठभूमि
परिवार का कहना है कि प्रिंस 10 मई 2024 को प्रेमानंद महाराज की एकांतिक वार्ता में भाग लेने के लिए केलि कुंज आश्रम आया था। वार्ता समाप्त होने के बाद वह आश्रम परिसर से बाहर नहीं आया और उसी दिन से उसका कोई पता नहीं चल सका। कई बार पुलिस और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी परिवार को कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। दो साल से अधिक समय तक बेटे की खोज में लगे माता‑पिता ने कई बार आश्रम से संपर्क किया, परन्तु कोई समाधान नहीं निकला।
धरने और मारपीट की घटना
बेटे की वापसी की मांग को लेकर दंपति ने आश्रम के बाहर धरने पर बैठने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनका बेटा वापस नहीं आता, वे आश्रम के बाहर से नहीं हटेंगे। धरने के दौरान आश्रम के कुछ अनुयायियों और शिष्यों के साथ बहस शुरू हुई। बहस तेज़ होते ही शब्दों का आदान‑प्रदान हुआ और अंततः शारीरिक टकराव में बदल गया। मारपीट की सूचना मिलने पर आसपास के लोगों ने पुलिस को बुलाया।
पुलिस की कार्रवाई
वृंदावन थाना पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने घटना में शामिल एक युवक को हिरासत में ले लिया और उसकी पूछताछ शुरू कर दी। साथ ही, पुलिस ने आश्रम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू कर दी और उपस्थित लोगों तथा गवाहों के बयान एकत्र किए। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मारपीट के कारण कोई गंभीर चोट नहीं आई, परन्तु घटना ने स्थानीय लोगों में असहजता पैदा कर दी।
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मुख्य बातें
- प्रिंस 10 मई 2024 को केलि कुंज आश्रम आया और उसी दिन से लापता है।
- परिवार ने बेटे की वापसी की मांग में आश्रम के बाहर धरने पर बैठकर विरोध किया।
- धरने के दौरान आश्रम के अनुयायियों के साथ बहस बढ़ी और मारपीट हुई।
- पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लेकर जांच शुरू की; सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान एकत्र किए जा रहे हैं।
- पुलिस ने घटना के साथ-साथ लापता बेटे से जुड़े दावों की भी पड़ताल करने का आश्वासन दिया।
पारिवारिक दर्द और आगे की संभावनाएँ
दो साल से अधिक समय तक बेटे की तलाश में लगे माता‑पिता ने कहा कि वे लगातार आश्रम के प्रबंधन से स्पष्ट जवाब चाहते हैं। उनका मानना है कि आश्रम के भीतर या आसपास की किसी भी गड़बड़ी ने उनके बेटे के लापता होने में भूमिका निभाई हो सकती है। वर्तमान में पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रैकिंग डेटा और आश्रम के भीतर के कर्मचारियों के बयान शामिल हैं। यदि कोई नई जानकारी मिलती है तो पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
निष्कर्ष
केलि कुंज आश्रम के बाहर हुई यह मारपीट घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी को उजागर करती है, बल्कि धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और सुरक्षा के प्रश्न को भी सामने लाती है। लापता बेटे की खोज में परिवार की निरंतर कोशिशें और पुलिस की सक्रिय जांच दोनों ही इस मामले के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।




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