मालेगांव केस: 3 साल की बच्ची के रेप‑हत्याकांड में विजय खैरनार को फांसी की सजा
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महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव तालुका के डोंगराळे गांव में नवंबर 2025 में हुई जघन्य घटना ने पूरे क्षेत्र में गहरा आक्रोश उत्पन्न किया। तीन साल की मासूम बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के बाद स्थानीय लोगों ने तेज़ न्याय और कड़ी सजा की मांग की। फास्ट‑ट्रैक अदालत ने इस मांग को सुनते हुए दोषी विजय खैरनार को फांसी की सजा सुनाई और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
डोंगराळे गांव में नवंबर 2025 में तीन साल की बच्ची के साथ रेप किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। घटना की खबर फैलते ही स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फास्ट‑ट्रैक सुनवाई की मांग की, ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके।
अदालत की सुनवाई और निर्णय
सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अभियोजन पक्ष की ओर से मृत्युदंड की मांग की। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि तीन साल की बच्ची के साथ रेप‑हत्याकांड के लिए कड़ी सजा अनिवार्य है। इन दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने विजय खैरनार को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। साथ ही, पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
मुख्य बातें
- घटना स्थान: डोंगराळे गांव, मालेगांव तालुका, नासिक जिला, महाराष्ट्र
- अपराध: तीन साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या
- दोषी: विजय खैरनार
- सजा: फांसी (मृत्युदंड)
- मुआवजा: पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये
- सुनवाई: फास्ट‑ट्रैक अदालत में हुई
समाज और सुरक्षा पर प्रभाव
इस जघन्य अपराध ने बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर किया। न्यायिक प्रक्रिया के इस चरण में फांसी की सजा और मुआवजा आदेश को कई लोग न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, परन्तु यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
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आगे की न्यायिक प्रक्रिया
फांसी की सजा के मामलों में अपील की संभावना रहती है। अदालत ने इस बात को भी नोट किया कि मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जिससे अंतिम निर्णय तक सभी कानूनी चरण पूरे किए जाएंगे।




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