इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में 5 जल शोधन संयंत्रों के लिए भूमि आवंटन और बजट प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को पाँच प्रस्तावित जल शोधन संयंत्रों (वॉटर प्यूरिफिकेशन प्लांट) के निर्माण में देरी न करने का सख्त निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जल शोधन संयंत्रों की स्थापना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है और सरकार को भूमि आवंटन व बजट स्वीकृति की प्रक्रिया तुरंत पूरी करनी चाहिए।
हाईकोर्ट का आदेश और याचिका का पृष्ठभूमि
जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में लखनऊ में जल शोधन संयंत्रों की कमी और मौजूदा जल गुणवत्ता समस्याओं को उजागर किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जल शोधन संयंत्रों की स्थापना अनिवार्य है और सरकार को अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
प्रस्तावित पाँच संयंत्रों का विवरण
हाईकोर्ट ने निम्नलिखित पाँच स्थानों पर जल शोधन संयंत्रों के निर्माण को तेज करने का निर्देश दिया:
- सीतापुर रोड – वित्तीय स्वीकृति के लिए 231.52 करोड़ रुपये का मामला मंत्रिमंडल के समक्ष विचाराधीन है; भूमि पहले ही जिलाधिकारी द्वारा आवंटित की जा चुकी है।
- बाराबंकी रोड – भूमि चिह्नित, अभी वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया शेष है।
- कानपुर रोड – भूमि चिह्नित, वित्तीय स्वीकृति की प्रतीक्षा।
- सुल्तानपुर रोड – भूमि चिह्नित, वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी।
- हरदोई रोड – भूमि चिह्नित, वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया शेष।
सीतापुर रोड संयंत्र की विशेषता
सीतापुर रोड पर प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र के लिए 231.52 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति का मामला वर्तमान में मंत्रिमंडल के समक्ष विचाराधीन है। अदालत ने कहा कि इस संयंत्र के लिए भूमि पहले ही जिलाधिकारी द्वारा आवंटित की जा चुकी है, इसलिए वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है।
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हाईकोर्ट के आगे के निर्देश
हाईकोर्ट ने सरकार को अगले सुनवाई से पहले एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें निम्नलिखित जानकारी शामिल हो:
- सीतापुर रोड संयंत्र के लिए मंत्रिमंडल के निर्णय की स्थिति।
- बाराबंकी, कानपुर, सुल्तानपुर और हरदोई रोड पर चिह्नित भूमि का विधिवत आवंटन और उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) को सौंपने की प्रक्रिया।
- शेष चार संयंत्रों के लिए वित्तीय स्वीकृति प्राप्त करने की प्रगति।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि सरकार इन निर्देशों का पालन नहीं करती है तो जनहित याचिका के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में 5 जल शोधन संयंत्रों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन और बजट स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया।
- सीतापुर रोड संयंत्र के लिए 231.52 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मंत्रिमंडल के समक्ष विचाराधीन है; भूमि पहले ही आवंटित।
- बाराबंकी, कानपुर, सुल्तानपुर और हरदोई रोड पर भी भूमि चिह्नित, वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया शेष।
- सरकार को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें सभी पाँच संयंत्रों की प्रगति का ब्यौरा हो।
- हाईकोर्ट ने कहा कि जल शोधन संयंत्रों की स्थापना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है और अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
इन निर्देशों के बाद लखनऊ में जल गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिससे शहर के नागरिकों को स्वच्छ पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।




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