KGMU में धर्मांतरण और शोषण का बड़ा मामला: STF की 10 महीने की जांच रिपोर्ट
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लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 10 महीने की गहन जांच के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसमें पाँच मुख्य आरोपियों और सात मददगारों को शामिल किया गया है।
जांच के प्रमुख निष्कर्ष
STF की रिपोर्ट के अनुसार, केजीएमयू के गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों में कम से कम 12 मामलों की पुष्टि हुई है। इन मामलों में महिला कर्मचारियों को झांसे में लेकर शारीरिक‑मानसिक उत्पीड़न, जबरन निकाह और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालना शामिल है।
मुख्य आरोपियों की सूची
- डॉ. रमीज (रमीजउद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक), सीनियर रेजिडेंट, पैथोलॉजी – जूनियर महिला डॉक्टरों को झांसे में लेकर शारीरिक‑मानसिक उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप।
- नाफिस, नर्सिंग स्टाफ, गांधी वार्ड – महिला नर्स को झांसे में लेकर शारीरिक‑मानसिक शोषण तथा जबरन निकाह और धर्म परिवर्तन कराने का आरोप।
- फुरकान, नर्सिंग स्टाफ, गांधी वार्ड – शोषण और धर्म परिवर्तन व शादी का दबाव डालने का आरोप।
- डॉ. आदिल, रेजिडेंट डॉक्टर, गांधी वार्ड – महिला कर्मचारियों को शादी का झांसा देकर शोषण करने का आरोप।
- शफात अली खान, संविदा कर्मी, माइक्रोबायोलॉजी – महिला कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ छेड़छाड़, पीछा और धर्म परिवर्तन व शादी का दबाव बनाने का आरोप।
संरक्षण और मामले को दबाने के आरोप
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केजीएमयू के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और प्राध्यापक शिकायतों के बावजूद पीड़ितों की बात नहीं सुन पाए और आरोपियों का बचाव करने की कोशिश की। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- प्रो. सुरेश बाबू (एचओडी, पैथोलॉजी) – डॉ. रमीज को क्लीनचिट देने और पीड़िता को मानसिक रूप से अस्वस्थ करने का आरोप।
- डॉ. सुमायरा कयूम (एडिशनल प्रोफेसर, पैथोलॉजी) – मुस्लिम रेजिडेंट्स को संरक्षण देने और अन्य डॉक्टरों के साथ भेदभाव करने का आरोप।
- डॉ. वाहिद अली (इंचार्ज बायोमीट्री लैब) – संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहने और आरोपी का पक्ष लेने का आरोप।
- प्रो. उस्मान कौसर (नेफ्रोलॉजिस्ट) – संस्थान के भीतर आरोपी समूह को शह देने का आरोप।
- डॉ. अहमद और डॉ. कलीम (असिस्टेंट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री) – वित्तीय/लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने का आरोप।
- एस. ए. अब्बास (सेवानिवृत्त क्लर्क) – प्रशासनिक कमेटियों और वित्तीय निवेशों में प्रभाव डालने का आरोप।
‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप का संदिग्ध जुड़ाव
STF ने ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नामक एक संदिग्ध समूह का भी उल्लेख किया है, जिसके साथ डॉ. परवेज, डॉ. शाहीन और मो. कैफ जैसे डॉक्टर जुड़े हुए हैं। जांचकर्ता अब इस समूह के बाहरी संगठनों और वित्तीय फंडिंग से जुड़े होने के कोण पर भी पड़ताल कर रहे हैं।
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मुख्य बातें
- केजीएमयू में कम से कम 12 मामलों में महिला कर्मचारियों का शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन पाया गया।
- 5 मुख्य आरोपियों और 7 मददगारों को STF की रिपोर्ट में शामिल किया गया।
- पार्टी, विभागीय वरिष्ठ और प्राध्यापकों पर मामले को दबाने और आरोपियों का बचाव करने का आरोप।
- ‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप के संभावित बाहरी वित्तीय समर्थन की जांच जारी।
STF ने अभी तक अंतिम रिपोर्ट नहीं दी है, परंतु इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। केजीएमयू प्रशासन को भी इस रिपोर्ट के प्रकाश में अपने सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र की समीक्षा करने का आह्वान किया गया है।




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