मुंबई में विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो की बैठक: ऊर्जा सहयोग और ट्रेड डील पर चर्चा
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मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के कई बिंदु सामने आए। यह बैठक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के मुख्य एजेंडा
बैठक में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई:
- ऊर्जा सहयोग – दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विचार किया।
- भारत‑अमेरिका ट्रेड डील – व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय को बढ़ाने के लिए संभावित समझौते की रूपरेखा पर चर्चा हुई।
- रूस से तेल खरीद – वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के मद्देनज़र, भारत की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीद के विकल्पों पर विचार किया गया।
ऊर्जा सहयोग के संभावित कदम
बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और निवेश को बढ़ावा देने की योजना पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने यह संकेत दिया कि भविष्य में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को गहरा किया जाएगा।
ट्रेड डील की दिशा
व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए, दोनों देशों ने टैरिफ में कमी, सेवा क्षेत्र में बाजार पहुंच और छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए समर्थन उपायों पर विचार किया। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है, और आगे की बातचीत की प्रतीक्षा है।
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रूस से तेल खरीद पर विचार
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत ने रूस से तेल आयात के विकल्पों को पुनः मूल्यांकन किया है। इस संदर्भ में, अमेरिकी प्रतिनिधि ने भारत को वैकल्पिक स्रोतों की खोज में सहयोग करने की इच्छा जताई।
मुख्य बातें
- बैठक मुंबई में हुई, जहाँ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मुलाकात की।
- ऊर्जा सहयोग, भारत‑अमेरिका ट्रेड डील और रूस से तेल खरीद तीन मुख्य चर्चा बिंदु थे।
- ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय प्रोजेक्ट्स, तकनीकी साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देने की संभावना पर सहमति बनी।
- ट्रेड डील के तहत टैरिफ में कमी, सेवा क्षेत्र में बाजार पहुंच और SMEs के समर्थन पर चर्चा हुई।
- रूस से तेल खरीद के विकल्पों पर दोनों पक्षों ने विचार किया, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।
- बैठक के परिणामों और आधिकारिक समझौतों की पुष्टि अभी बाकी है।
यह मुलाकात दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की संभावना रखती है, और आगे की आधिकारिक जानकारी के आने पर इस पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।




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