इज़राइल के राष्ट्रीय चुनाव: 7 अक्टूबर के हमले के बाद प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
3 मिनट में पढ़ें

हामास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इज़राइल में राष्ट्रीय चुनाव हो रहे हैं, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक जनमत संग्रह की तरह देखे जा रहे हैं। इस चुनाव में सुरक्षा चूक, अति‑रूढ़िवादीयों को सैन्य सेवा से छूट, न्यायिक सुधार और महंगाई प्रमुख मुद्दे बनकर सामने आए हैं।
मुख्य चुनावी मुद्दे
- सुरक्षा चूक – 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता और बंधकों की रिहाई को लेकर नेतन्याहू पर सवाल उठ रहे हैं।
- सैन्य सेवा से छूट – अति‑रूढ़िवादी (अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स) पार्टियों की मांग है कि धार्मिक पढ़ाई करने वाले युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट दी जाए। यह मुद्दा लगभग एक‑चौथाई यहूदी वोटर्स के लिए निर्णायक है।
- न्यायिक सुधार – सुप्रीम कोर्ट की शक्ति को कम करने और जजों की नियुक्ति में बदलाव लाने के प्रस्तावों को कई लोग सत्ता हथियाने की कोशिश मानते हैं।
- महंगाई और जीवन‑यापन की लागत – राइचमैन यूनिवर्सिटी की रिसर्च के अनुसार इज़राइल में जीवन‑यापन की लागत यूरोप के कई समृद्ध देशों से भी अधिक है, जिससे आर्थिक असंतोष बढ़ रहा है।
वोटर की राय और मतदान पर प्रभाव
इज़राइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के एक सर्वे के अनुसार, लगभग 68 % यहूदी इज़राइलियों का मानना है कि 7 अक्टूबर की घटनाएँ उनके पार्टी समर्थन को तय करने में अहम कारक हैं। वहीं, अरब अल्पसंख्यकों में केवल 32 % ने इसे प्रमुख मुद्दा बताया, जबकि अधिकांश ने अपराध को प्राथमिक चिंता माना।
सुरक्षा और बंधक मुद्दा
मतदान केंद्रों में ट्रेन स्टेशनों की दीवारों पर शहीद सैनिकों के चेहरे और बंधकों के सम्मान में पीले रिबन लगाए गए हैं। यह प्रतीकात्मक कदम जनता के बीच सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करता है।
सैन्य सेवा से छूट का विवाद
हर साल लगभग 13,000 अति‑रूढ़िवादी पुरुष 18 वर्ष की उम्र तक पहुँचते हैं, लेकिन उनमें से 10 % से भी कम ही सेना में शामिल होते हैं। इस कारण से धर्मनिरपेक्ष बहुसंख्यक में नाराज़गी बढ़ी है। नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइसेनकोट ने इन छूटों को समाप्त करने का वादा किया है, जिससे यह मुद्दा चुनाव में “शायद सबसे अहम” बन गया है।
आपके लिए संबंधित खबरें
न्यायिक सुधार के विरोध
2023 में न्यायिक सुधार के प्रस्तावों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। आलोचकों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की दिशा में है, जबकि नेतन्याहू इसे “जजों की अनियंत्रित शक्ति” को सीमित करने के रूप में पेश करते हैं।
आर्थिक दबाव और महंगाई
सारित मेनाहेम‑कार्मी की रिसर्च के अनुसार, इज़राइल में जीवन‑यापन की लागत ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देशों से भी अधिक है। नेतन्याहू का दावा है कि उनकी नीतियों ने टेक सेक्टर को विश्व‑स्तरीय बनाया, पर विरोधी तर्क देते हैं कि इस विकास में कई इज़राइली पीछे रह गए हैं।
निष्कर्ष
इज़राइल के इस राष्ट्रीय चुनाव में सुरक्षा, सैन्य सेवा, न्यायिक सुधार और आर्थिक स्थितियों के मुद्दे गहरी विभाजन रेखा खींच रहे हैं। 7 अक्टूबर की घटनाओं का प्रभाव मतदाता के निर्णय में स्पष्ट दिख रहा है, और यह चुनाव बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए एक निर्णायक परीक्षा बन चुका है।




टिप्पणियाँ
0