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हुजूरबाद में अंतिम संस्कार के दौरान नब्ज भ्रम: परिजनों ने अस्पताल में दोबारा जांच कर मौत की पुष्टि देखी

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 11 Oct 2026• अपडेट 11 Oct 2026
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हुजूरबाद में अंतिम संस्कार के दौरान नब्ज भ्रम: परिजनों ने अस्पताल में दोबारा जांच कर मौत की पुष्टि देखी
तेलंगाना के करीमनगर जिले के हुजूरबाद में एक महिला के शव को चिता पर रखने के दौरान एक रिश्तेदार ने नब्ज चलने का दावा किया। परिजन तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों…

तेलंगाना के करीमनगर जिले के हुजूरबाद में एक भावनात्मक घटना ने स्थानीय लोगों को हिला कर रख दिया। एकलव्य कॉलोनी की निवासी सरिता को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, फिर भी अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान एक रिश्तेदार ने नब्ज चलने का दावा किया। परिजन तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने दोबारा जांच कर मृत्यु की पुष्टि की।

घटना की पृष्ठभूमि

सरिता कई महीनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। परिवार के अनुसार, उनका स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अचानक उनका निधन हो गया। परिजन पारंपरिक रीति‑रिवाजों के अनुसार श्मशान घाट में अंतिम विदाई की तैयारियों में लगे थे।

चिता पर नब्ज का दावा

शव को चिता पर रखने के दौरान एक रिश्तेदार ने देखा कि महिला के शरीर में अभी भी नब्ज चल रही है और हल्की हरकत महसूस हो रही है। यह देख कर शोक में डूबे परिवार को आशा की एक किरण मिली। बिना देर किए परिजनों ने एम्बुलेंस बुलाकर सरिता को नजदीकी अस्पताल ले जाने का निर्णय किया।

अस्पताल में दोबारा जांच

हुजूरबाद के निकटतम अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में परिजनों की भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों ने तुरंत ECG और अन्य आवश्यक जांचें कीं। जांच के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि महिला की मृत्यु पहले ही हो चुकी है और नब्ज चलने का दावा केवल भ्रम या गलतफहमी था।

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परिजनों की प्रतिक्रिया

डॉक्टरों के बयान के बाद परिजनों में गहरा शोक और निराशा छा गई। कई लोग चिल्लाते हुए अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए, जबकि कुछ ने इस घटना को एक दुखद त्रासदी के रूप में वर्णित किया। इस घटना ने पूरे हुजूरबाद इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया।

मुख्य बातें

  • सरिता को डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, फिर भी अंतिम संस्कार के दौरान एक रिश्तेदार ने नब्ज चलने का दावा किया।
  • परिजन तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल ले गए।
  • डॉक्टरों ने ECG सहित विस्तृत जांच के बाद मृत्यु की पुष्टि की।
  • परिजनों ने इस भ्रम के कारण गहरा शोक व्यक्त किया।

यह घटना स्थानीय समुदाय में पारंपरिक रीति‑रिवाजों और आधुनिक चिकित्सा के बीच की टकराव को उजागर करती है। जबकि कई लोग धार्मिक मान्यताओं के आधार पर आशा की तलाश करते हैं, डॉक्टरों की वैज्ञानिक जांचें अक्सर स्पष्ट उत्तर देती हैं। इस मामले में, दोबारा जांच ने यह सिद्ध किया कि नब्ज चलने का दावा केवल एक भ्रम था, न कि वास्तविक चमत्कार।

समुदाय की प्रतिक्रिया और भविष्य की सावधानी

हुजूरबाद के निवासी इस घटना पर चर्चा कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील कर रहे हैं। स्थानीय सामाजिक समूहों ने कहा कि मृत्यु की पुष्टि के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएँ पूरी की जानी चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।

यह घटना यह भी याद दिलाती है कि पारंपरिक रीति‑रिवाजों के साथ-साथ वैज्ञानिक जांचों को भी महत्व देना चाहिए, विशेषकर जब जीवन‑और‑मृत्यु के सवाल हों।

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