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हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पर एडमिरल पापारो के भारत दौरे की अहम बातें

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 06 Oct 2026• अपडेट 06 Oct 2026• 1 views
हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पर एडमिरल पापारो के भारत दौरे की अहम बातें
अमेरिकी नौसेना के एडमिरल सैमुअल पापारो ने 5‑8 अक्टूबर के दौरान भारत के शीर्ष रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की, जिससे भारत‑अमेरिका की रक्षा‑आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिली।

अमेरिकी नौसेना के एडमिरल सैमुअल पापारो ने 5 से 8 अक्टूबर तक भारत का दौरा किया, जिसमें उन्होंने भारतीय रक्षा के प्रमुख जनरलों और वाइस‑चीफ्स से विस्तृत चर्चा की। यह यात्रा हिंद‑प्रशांत में अमेरिकी सैन्य रणनीति और भारत‑अमेरिका रक्षा साझेदारी के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

एडमिरल पापारो की भारत यात्रा का प्रमुख उद्देश्य

एडमिरल पापारो, जो अमेरिकी इंडो‑पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) के कमांडर हैं, लगभग 4 लाख अमेरिकी सैन्य एवं नागरिक कर्मियों की कमान संभालते हैं। उनका भारत दौरा दो मुख्य पहलुओं पर केंद्रित था – रक्षा सहयोग को गहरा करना और व्यापार‑निवेश संबंधों को सुदृढ़ बनाना। अमेरिकी दूतावास ने इस मुलाकात को भारत‑अमेरिका की प्रमुख रक्षा साझेदारी की बढ़ती ताकत, महत्वाकांक्षा और रणनीतिक अहमियत का संकेत बताया।

रक्षा सहयोग के प्रमुख बिंदु

डिनर समारोह में उपस्थित भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, वाइस‑चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने एडमिरल पापारो के साथ भारत‑अमेरिका के सामरिक सहयोग के भविष्य पर विचार‑विमर्श किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त अभ्यास, नौसैनिक सहयोग, और इंडो‑पैसिफिक में सामरिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए नई तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की।

व्यापार‑निवेश सहयोग का नया आयाम

डिनर में अमेरिकी दूतावास ने रक्षा सहयोग के साथ-साथ व्यापार‑निवेश संबंधों को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट ने आर्थिक शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को गहरा करने में अमेरिकी राज्यों, व्यवसायों और इनोवेटर्स की बढ़ती भूमिका है। इस संदर्भ में दोनों देशों ने तकनीकी हस्तांतरण, स्टार्ट‑अप सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में संभावित प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा की।

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मुख्य बातें

  • एडमिरल सैमुअल पापारो 5‑8 अक्टूबर तक भारत में रहे, इंडो‑पैसिफिक कमांड के कमांडर के रूप में 4 लाख अमेरिकी कर्मियों की कमान संभालते हैं।
  • डिनर समारोह में भारत के प्रमुख रक्षा अधिकारी – CDS जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, वाइस‑चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के एयर मार्शल तेजिंदर सिंह उपस्थित रहे।
  • संयुक्त रक्षा सहयोग के तहत संयुक्त अभ्यास, नौसैनिक सहयोग और नई तकनीकी साझेदारी पर चर्चा हुई।
  • व्यापार‑निवेश के क्षेत्र में अमेरिकी राज्यों, व्यवसायों और इनोवेटर्स की भूमिका को रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला आर्थिक आधार बताया गया।
  • डिनर में मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट ने आर्थिक शक्ति के महत्व पर जोर दिया और द्विपक्षीय निवेश को गहरा करने की इच्छा व्यक्त की।

हिंद‑प्रशांत में रणनीतिक परिप्रेक्ष्य

एडमिरल पापारो की यात्रा उस समय आई है जब चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति को लेकर अमेरिका और भारत दोनों ही अपने रणनीतिक हितों को पुनः परिभाषित कर रहे हैं। इंडो‑पैसिफिक में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बनाए रखने और विश्वसनीय प्रतिरोध स्थापित करने के लिए भारत को प्रमुख साझेदार माना जा रहा है। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच रक्षा‑आर्थिक सहयोग को एक व्यापक रणनीतिक ढाँचे में देखा जा रहा है।

आगे की संभावनाएँ

डिनर के बाद जारी होने वाली औपचारिक बैठकों में संभावित समझौते, संयुक्त अभ्यास कैलेंडर और व्यापार‑निवेश प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च‑स्तरीय मुलाकातें न केवल सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि आर्थिक सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के बीच विश्वास‑पात्रता को भी बढ़ाती हैं।

हिंद‑प्रशांत में स्थिरता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारत‑अमेरिका की इस रणनीतिक साझेदारी को आगे भी गहरा करने की उम्मीद है।

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