Skip to content
Sunday, 18 October 2026|India
18 Octआज की खबरें
ऐप डाउनलोड
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
बुलंदशहर: हनी हत्याकांड का मुख्य आरोपी मात्र 16 घंटे में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश घायल•अमेरिका में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने पैरामोटर से ऑफिस का सफर किया, वीडियो वायरल•शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार श्रद्धा दुबे की नई लोकेशन और सरेंडर की संभावनाएँ•फालोदी में 9 साल के भोमाराम की बोरवेल में गिरावट: 39 घंटे के रेस्क्यू के बाद भी मौत•प्रयागराज में गंगा के तेज कटान से मचान वाले बाबा की कुटिया ढह गई, सुबह ही सुरक्षित निकाले गए•उन्नाव में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर एसी बस में अचानक आग, स्कूली बच्चों को बचाया गया•जियो आईपीओ: शेयर बाजार में नया इतिहास रचने की तैयारी•गोरेगांव में 18 महीने की बच्ची की मौत, पड़ोसी 10 साल की लड़की पर धक्का देने का आरोपबुलंदशहर: हनी हत्याकांड का मुख्य आरोपी मात्र 16 घंटे में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश घायल•अमेरिका में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने पैरामोटर से ऑफिस का सफर किया, वीडियो वायरल•शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार श्रद्धा दुबे की नई लोकेशन और सरेंडर की संभावनाएँ•फालोदी में 9 साल के भोमाराम की बोरवेल में गिरावट: 39 घंटे के रेस्क्यू के बाद भी मौत•प्रयागराज में गंगा के तेज कटान से मचान वाले बाबा की कुटिया ढह गई, सुबह ही सुरक्षित निकाले गए•उन्नाव में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर एसी बस में अचानक आग, स्कूली बच्चों को बचाया गया•जियो आईपीओ: शेयर बाजार में नया इतिहास रचने की तैयारी•गोरेगांव में 18 महीने की बच्ची की मौत, पड़ोसी 10 साल की लड़की पर धक्का देने का आरोप
विज्ञापन
Home » गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता: MRI क्यों नहीं?
Health

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता: MRI क्यों नहीं?

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 18 Oct 2026• अपडेट 17 Oct 2026
GB News India ऐप डाउनलोड करेंGoogle Play Store पर उपलब्ध
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता: MRI क्यों नहीं?
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिक जांच के रूप में क्यों चुना जाता है, जबकि MRI अधिक स्पष्ट चित्र प्रदान करता है, इस पर विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्या गोस्वामी ने बताया कारण।

गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे की सेहत की निगरानी के लिए अल्ट्रासाउंड को प्राथमिक जांच के रूप में अपनाया जाता है। जबकि MRI तकनीक अधिक स्पष्ट 3‑डायमेंशनल छवियां देती है, इसे गर्भावस्था में सामान्यतः नहीं किया जाता। इस लेख में हम विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्या गोस्वामी के बयानों के आधार पर इस अंतर के कारणों को समझेंगे।

अल्ट्रासाउंड बनाम MRI: तकनीकी अंतर

अल्ट्रासाउंड ध्वनि तरंगों का उपयोग करके शरीर के अंदर की तस्वीरें लेता है, जिससे कोई आयनित विकिरण नहीं उत्पन्न होता। दूसरी ओर, MRI में तेज़ चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) और रेडियो तरंगों का प्रयोग होता है, जो शरीर के तापमान में हल्की वृद्धि कर सकता है। गर्भ में विकसित भ्रूण इन तापीय बदलावों के प्रति संवेदनशील हो सकता है, इसलिए डॉक्टर इसे सावधानी से देखते हैं।

अल्ट्रासाउंड के फायदे

  • रेडिएशन‑फ्री: ध्वनि तरंगों से कोई हानिकारक विकिरण नहीं उत्पन्न होता।
  • तेज़ और सुविधाजनक: स्कैन में कुछ मिनट ही लगते हैं, और प्रक्रिया के दौरान माँ को असहजता नहीं होती।
  • भ्रूण की हार्टबीट, स्थान, विकास आदि की प्रारम्भिक जानकारी प्रदान करता है।

MRI के संभावित जोखिम

  • तेज़ चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों से शरीर के तापमान में हल्की वृद्धि।
  • स्कैन के दौरान 30 मिनट तक स्थिर रहने की आवश्यकता, जिससे गर्भवती महिला को असहजता या घबराहट हो सकती है।
  • भले ही विकिरण नहीं होता, लेकिन उच्च चुंबकीय क्षेत्र के प्रभावों को लेकर अभी भी सावधानी बरती जाती है।

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड की समय-सारणी

डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में कुल 3‑5 बार अल्ट्रासाउंड किया जाता है:

  1. पहला स्कैन (6‑8 सप्ताह): भ्रूण की हार्टबीट, गर्भधारण की पुष्टि और गर्भस्थली की स्थिति जाँचते हैं।
  2. दूसरा स्कैन (11‑14 सप्ताह): भ्रूण की संरचनात्मक विकास, नालियों की स्थिति और संभावित जन्म दोषों की प्रारम्भिक जाँच।
  3. तीसरा स्कैन (18‑22 सप्ताह): विस्तृत एनीमेट्रिक स्कैन, अंगों की स्पष्टता और विकास दर की जाँच।
  4. चौथा स्कैन (28‑32 सप्ताह): प्लेसेंटल कार्य, भ्रूण की स्थिति और वजन अनुमान।
  5. प्री‑डिलीवरी स्कैन: डिलीवरी से पहले अंतिम जाँच, जिसमें प्लेसेंटल परिपक्वता और संभावित जटिलताओं की निगरानी की जाती है।

कब MRI की सलाह दी जा सकती है?

गर्भावस्था में MRI पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। यदि अल्ट्रासाउंड से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती या कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या का संदेह हो, तो डॉक्टर नॉन‑कंट्रास्ट (डाई‑रहित) MRI की सलाह दे सकते हैं। यह विकल्प केवल तब अपनाया जाता है जब स्थिति अत्यंत आवश्यक हो और संभावित लाभ जोखिम से अधिक हो।

आपके लिए संबंधित खबरें

मुख्य बातें

  • अल्ट्रासाउंड ध्वनि तरंगों से काम करता है, इसलिए कोई रेडिएशन जोखिम नहीं।
  • MRI में तेज़ चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगें होती हैं, जिससे शरीर के तापमान में हल्की वृद्धि हो सकती है।
  • गर्भावस्था में सामान्यतः 3‑5 बार अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जो विभिन्न विकास चरणों में आवश्यक जानकारी प्रदान करता है।
  • गंभीर मामलों में, अल्ट्रासाउंड से स्पष्ट जानकारी न मिलने पर नॉन‑कंट्रास्ट MRI का उपयोग किया जा सकता है।
  • अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया तेज़, कम असहजता वाली और सस्ते दाम में उपलब्ध है, जबकि MRI में अधिक समय और विशेष व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

इन कारणों से डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड को प्राथमिक जांच के रूप में सुझाते हैं, जबकि MRI को केवल विशेष परिस्थितियों में ही अपनाते हैं।

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *