G20 में भारत की पहल: यूक्रेन‑रूस संघर्ष के समाधान के तीन मुख्य एजेंडे
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अटलांटा में 30‑31 अक्टूबर को आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ तीन प्रमुख एजेंडे पर चर्चा की। यह मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई और भारत की शांति‑स्थापना में सक्रिय भूमिका को उजागर करती है।
मुख्य एजेंडे
- नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकना: जयशंकर ने कहा कि युद्ध में आम नागरिकों के शिपिंग को लक्ष्य बनाना नहीं चाहिए, जिससे वैश्विक व्यापार और मानवीय सहायता पर असर न पड़े।
- अनाज निर्यात का पुनरुद्धार: रूस और यूक्रेन दोनों ही विश्व के प्रमुख अनाज निर्यातक हैं। ब्लैक सी में अनाज की आपूर्ति में तीव्र गिरावट आई है; दोनों पक्षों से निर्यात फिर से शुरू करने का मार्ग खोजने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा: ऊर्जा क्षेत्र में रिफाइनरी, ग्रिड और ईंधन ले जाने वाले जहाजों को लक्षित करने वाले हमलों को रोकना सबसे जटिल मुद्दा है, क्योंकि इसका प्रभाव विभिन्न पक्षों के लिए अलग‑अलग है।
अमेरिका के साथ तालमेल
जयशंकर ने बताया कि भारत ने अमेरिकी शांति‑मध्यस्थता पहल (Peace Mediation Initiative) के साथ भी समन्वय किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो को इस प्रक्रिया की व्यापक रूपरेखा का अंदाज़ा है, पर अभी तक सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिल्ली और बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता की थी। जयशंकर ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने भी मॉस्को और कीव दोनों की यात्राएँ कीं, जिससे सभी पक्षों के साथ निरंतर संवाद स्थापित हो रहा है।
भविष्य की दिशा
जैशंकर ने संकेत दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति‑स्थापना के लिए निरंतर प्रयास करेगा, लेकिन वर्तमान में सभी रणनीतिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। इस दौरान, G20 के अन्य सदस्य देशों के साथ भी समान मुद्दों पर चर्चा जारी है।
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मुख्य बातें
- G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने तीन प्रमुख शांति‑एजेंडे पेश किए।
- नागरिक शिपिंग, अनाज निर्यात और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को सुरक्षा के मुख्य बिंदु माना गया।
- भारत ने अमेरिकी शांति‑मध्यस्थता पहल के साथ तालमेल बिठाया।
- प्रधानमंत्री मोदी ने भी पुतिन के साथ सीधे वार्ता की, जिससे भारत की मध्यस्थता भूमिका मजबूत हुई।




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