पूर्व जस्टिस गोपाल गौड़ा ने SIR फैसले की वैधता पर उठाए गंभीर सवाल
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (EC) द्वारा लागू किए गए “सुपर इंटेग्रिटी रिव्यू” (SIR) को बरकरार रखने के अपने फैसले को लेकर पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोपाल गौड़ा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि EC ने तथ्य‑आधारित जानकारी को गलत तरीके से पेश किया, जिससे अदालत को गुमराह किया गया। इस आधार पर SIR से संबंधित निर्णय लिया गया था, जिसके पुनरावलोकन की मांग जस्टिस गौड़ा ने की।
जस्टिस गौड़ा के मुख्य आरोप
जस्टिस गोपाल गौड़ा ने अपने बयान में तीन प्रमुख बिंदु उजागर किए:
- तथ्य‑गुमराह करना: चुनाव आयोग ने SIR के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेज़ों में तथ्यात्मक त्रुटियाँ कीं, जिससे सुप्रीम कोर्ट को गलत दिशा में ले जाया गया।
- निर्णय की प्रक्रिया: उन्होंने कहा कि SIR का निर्णय पूरी आयोग की पीठ की सहमति से नहीं, बल्कि कुछ व्यक्तियों के एकत्रित मत से लिया गया हो सकता है।
- अवैधता एवं असंवैधानिकता: यदि यह सिद्ध हो जाता है कि निर्णय प्रक्रिया में अनियमितता रही, तो यह स्पष्ट रूप से अवैध और असंवैधानिक माना जाएगा।
रिकॉर्ड की मांग
जस्टिस गौड़ा ने चुनाव आयोग से SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब करने की मांग की है। उनका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि:
- SIR लागू करने का निर्णय पूरी आयोग की बहुमत वाली सहमति से लिया गया था या नहीं।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
यदि इन प्रश्नों के उत्तर नकारात्मक आते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट को अपने पूर्व फैसले की समीक्षा या उसे वापस लेने पर विचार करना चाहिए, जैसा कि जस्टिस गौड़ा ने सुझाव दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के सामने संभावित कदम
जस्टिस गौड़ा के बयान के बाद, कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को दो विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है:
- सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा फैसले की पुनः समीक्षा करना, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्णय प्रक्रिया संविधान के अनुरूप थी।
- यदि रिकॉर्ड से स्पष्ट हो कि प्रक्रिया में अनियमितता थी, तो मौजूदा फैसले को वापस लेना और नई सुनवाई का आदेश देना।
मुख्य बातें
- पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोपाल गौड़ा ने SIR फैसले की वैधता पर सवाल उठाए।
- उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने तथ्य‑गुमराह करके अदालत को भ्रामित किया।
- गौड़ा ने EC से सभी संबंधित रिकॉर्ड तलब करने की मांग की।
- यदि प्रक्रिया में अनियमितता सिद्ध होती है, तो फैसले की असंवैधानिकता स्पष्ट हो सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट को अपने पूर्व निर्णय की पुनः समीक्षा या वापस लेने पर विचार करना चाहिए।
जस्टिस गौड़ा के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि SIR से जुड़ी कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। आगे के विकास के लिए अदालत, चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों के बीच संवाद जारी रहेगा।




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