‘एक देश, एक चुनाव’ पर JPC‑सुप्रीम कोर्ट की बैठक रद्द: कारणों का खुलासा
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‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation One Election – ONOE) पर बनी संयुक्त संसद समिति (JPC) की बैठक को 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ आयोजित करने की योजना थी, परन्तु बाद में इसे रद्द कर दिया गया। इस रद्दीकरण के पीछे के कारणों को JPC के चेयरमैन पी. पी. चौधरी ने विस्तृत रूप से बताया।
बैठक की योजना और प्रारम्भिक स्वीकृति
22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने संसद सचिवालय को ई‑मेल के माध्यम से सूचित किया कि 6 अक्टूबर को शाम 4.30 बजे सुप्रीम कोर्ट में JPC के लगभग 35 सदस्यों और छह अधिकारियों के साथ एक अनौपचारिक चर्चा आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्य न्यायाधीश (CJI) और अन्य वरिष्ठ जजों के साथ ONOE के प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर विचार‑विमर्श करने का इरादा था। लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी भी 18 सितंबर को प्राप्त हो चुकी थी, जब लोकसभा सचिवालय ने सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को पत्र लिखकर इस ‘स्थानीय अध्ययन दौरे’ की इच्छा व्यक्त की थी।
रद्दीकरण का कारण
बैठक के प्रस्ताव पर 1 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के महासचिव के कार्यालय ने बताया कि वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच चर्चा के बाद यह तय हुआ कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है। इस संभावित समीक्षा को देखते हुए, प्रशासनिक स्तर पर ऐसी चर्चा करना न तो उचित माना गया और न ही वांछनीय। परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द कर दी और JPC को इस निर्णय की सूचना दी।
पी. पी. चौधरी का बचाव
JPC के चेयरमैन ने कहा कि 1950 के दशक में भी संसदीय समितियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से अनौपचारिक बातचीत की गई थी, इसलिए इस प्रकार की बैठक का कोई वैध precedent मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट को लगा कि यह ‘उचित नहीं’ है, तो आगे कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं है।
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विपक्षी दल की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का प्रारम्भिक सुझाव विपक्षी दल डीएमके के सांसद पी. विल्सन ने दिया था, जिसके बाद बैठक की योजना बनायी गयी। लेकिन बाद में न्यायिक समीक्षा की संभावना को देखते हुए इसे रद्द कर दिया गया।
मुख्य बातें
- ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी JPC ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ अनौपचारिक चर्चा की योजना बनाई।
- लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों द्वारा प्रारम्भिक स्वीकृति प्राप्त हुई थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने बाद में बैठक रद्द कर दी, क्योंकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है।
- JPC के चेयरमैन पी. पी. चौधरी ने इस रद्दीकरण को ‘उचित नहीं’ कहे जाने के कारण से समझाया।
- बैठक का सुझाव पहले विपक्षी सांसद पी. विल्सन ने दिया था।
आगे की संभावनाएँ
बैठक रद्द होने के बाद भी ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव पर चर्चा जारी रहेगी। यदि यह संशोधन संसद में पारित होता है, तो इसे भविष्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संवैधानिक वैधता के लिए चुनौती दी जा सकती है। इस संदर्भ में, संसद और न्यायपालिका के बीच संवाद की सीमाओं और प्रक्रियात्मक शर्तों पर पुनः विचार आवश्यक हो सकता है।
सभी पक्षों को इस मुद्दे पर पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संतुलन बना रहे।




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