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अपराध

ED ने दिल्ली के महारानी बाग में आम्रपाली ग्रुप की ₹54 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया

2 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 10 Oct 2026• अपडेट 10 Oct 2026
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ED ने दिल्ली के महारानी बाग में आम्रपाली ग्रुप की ₹54 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया
प्रवर्तन निदेशालय ने आम्रपाली ग्रुप और अन्य के खिलाफ धनशोधन जांच के तहत दिल्ली के पॉश महारानी बाग में 54.71 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया। यह…

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के महारानी बाग इलाके में आम्रपाली ग्रुप की एक संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया है। यह कदम समूह द्वारा घर खरीदारों के साथ की गई धोखाधड़ी और धनशोधन की जांच के तहत उठाया गया है।

कुर्क की गई संपत्ति का विवरण

ED ने बताया कि 54.71 करोड़ रुपये मूल्य की इस संपत्ति को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया गया है। लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने इसे अस्थायी रूप से कुर्क किया है। संपत्ति ए-3 (न्यू), महारानी बाग, दिल्ली में स्थित है।

धोखाधड़ी के आरोप

आरोप है कि आम्रपाली ग्रुप ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई आवासीय परियोजनाएँ शुरू कीं और 36 महीने के भीतर फ्लैट देने तथा सुनिश्चित रिटर्न का वादा करके घर खरीदारों से बड़ी रकम जुटाई। लेकिन ये परियोजनाएँ पूरी नहीं हुईं, खरीदारों को न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उनकी रकम लौटाई गई।

फॉरेंसिक ऑडिट के निष्कर्ष

ED के फॉरेंसिक ऑडिट में पता चला कि समूह ने घर खरीदारों से जुटाई गई 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को मुखौटा कंपनियों और ग्रुप की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया। ग्रुप के निदेशकों ने पेशेवर शुल्क की आड़ में रकम की हेराफेरी की।

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रक़म का प्रवाह

ED ने कहा कि इस रकम का एक हिस्सा आम्रपाली ग्रुप के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के जरिए ऋण के रूप में सीधे और अन्य माध्यमों से दिल्ली की सुरभी एडवरटाइजिंग को भेजा गया।

कानूनी पृष्ठभूमि

यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज है और उत्तर प्रदेश पुलिस तथा दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज 18 FIR से जुड़ा है।

मुख्य बातें

  • ED ने दिल्ली के महारानी बाग में आम्रपाली ग्रुप की ₹54.71 करोड़ मूल्य की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया।
  • संपत्ति को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • आरोप है कि समूह ने नोएडा‑ग्रेटर नोएडा में आवासीय परियोजनाओं के वादे पर घर खरीदारों से ₹5,000 करोड़ से अधिक जुटाए।
  • जमा की गई रकम को मुखौटा कंपनियों और ग्रुप की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
  • यह मामला PMLA के तहत है और 18 FIR से जुड़ा है।

ED ने आगे कहा कि जांच जारी रहेगी और संबंधित व्यक्तियों एवं कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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