दो मकानों के किराए पर HRA टैक्स छूट: नियम और गणना की पूरी जानकारी
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हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भारत में वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय टैक्स बचत उपायों में से एक है। लेकिन क्या आप दो अलग‑अलग शहरों में दो मकानों के किराए पर HRA छूट ले सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(13A) में निर्धारित शर्तों में निहित है। नीचे हम इस नियम को विस्तार से समझेंगे और HRA की गणना तथा वैकल्पिक विकल्पों पर प्रकाश डालेंगे।
HRA टैक्स छूट के मूल नियम
इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10(13A) के अनुसार, HRA पर टैक्स छूट तभी मिलती है जब कर्मचारी स्वयं उस किराए वाले मकान में रहता हो, जिसका किराया वह भुगतान करता है। अर्थात्, छूट केवल उस आवास के किराए पर लागू होती है जहाँ कर्मचारी का वास्तविक निवास होता है। यदि कर्मचारी नौकरी वाले शहर में किराए के मकान में रहता है और साथ ही अपने माता‑पिता के दूसरे शहर के मकान का किराया भी देता है, तो केवल नौकरी वाले शहर के किराए पर ही HRA छूट का दावा किया जा सकता है।
मुख्य बातें
- HRA छूट केवल उस मकान के किराए पर मिलती है जहाँ कर्मचारी स्वयं रहता है।
- दूसरे शहर में माता‑पिता के मकान का किराया देने पर HRA छूट नहीं मिलती।
- यदि कर्मचारी के पास HRA नहीं है, तो वह सेक्शन 10(13A) के तहत छूट नहीं ले सकता।
- ऐसे मामलों में सेक्शन 80GG के तहत किराए पर कटौती का विकल्प उपलब्ध है, बशर्ते शर्तें पूरी हों।
HRA की गणना कैसे होती है?
HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट तीन मानदंडों में से सबसे कम राशि पर निर्धारित होती है:
- नियोक्ता द्वारा वास्तविक रूप से प्रदान किया गया HRA।
- कुल किराए में से (बेसिक सैलरी + डीए) का 10% घटाने के बाद बची राशि।
- मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई) में सैलरी का 50% और गैर‑मेट्रो शहरों में 40%।
इनमें से जो राशि सबसे कम होगी, वही HRA छूट के रूप में मिलती है। सैलरी की गणना में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) को शामिल किया जा सकता है, जो कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है।
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पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था में HRA
HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में उपलब्ध है। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने वाले कर्मचारियों को पूरे HRA पर टैक्स देना पड़ता है, क्योंकि नई व्यवस्था में कई छूटें और कटौतियाँ समाप्त कर दी गई हैं। इसलिए, यदि आप दो मकानों के किराए पर छूट चाहते हैं, तो पहले यह तय करें कि आप कौन सी टैक्स व्यवस्था अपनाते हैं।
यदि HRA नहीं मिलता तो क्या विकल्प है?
जिन कर्मचारियों को वेतन में HRA नहीं मिलता, वे सेक्शन 10(13A) के तहत छूट का दावा नहीं कर सकते। लेकिन वे सेक्शन 80GG के तहत किराए पर कटौती का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते वे निम्नलिखित शर्तें पूरी करें:
- कर्मचारी के पास स्वयं का कोई घर नहीं होना चाहिए (जैसे स्वामित्व या परिवार के नाम पर)।
- कर्मचारी को किराए का भुगतान करना चाहिए और उसका प्रमाण (रेंट एग्रीमेंट, रसीद) मौजूद होना चाहिए।
- किराए की राशि निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए (वर्तमान में ₹5,000 से अधिक)।
यदि ये शर्तें पूरी होती हैं, तो कर्मचारी अपनी आय से अधिकतम ₹5,000 या वास्तविक किराए में से अधिकतम (वेतन – 10% of salary) की कटौती का दावा कर सकता है।
सारांश
दो अलग‑अलग शहरों में दो मकानों के किराए पर HRA टैक्स छूट का दावा करना संभव नहीं है। छूट केवल उस मकान पर मिलती है जहाँ कर्मचारी स्वयं रहता है और वह किराया वह स्वयं भुगतान करता है। यदि HRA नहीं मिलता या नई टैक्स व्यवस्था चुनी गई है, तो सेक्शन 80GG के तहत किराए की कटौती का विकल्प उपलब्ध है, बशर्ते नियत शर्तें पूरी हों। टैक्स बचत के लिए अपने रोजगार अनुबंध, सैलरी स्ट्रक्चर और निवास स्थिति को ध्यान से जांचें और आवश्यक दस्तावेज़ तैयार रखें।




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