124 रिटायर्ड अधिकारियों ने चुनाव आयोग और SIR का बचाव किया, धांधली के आरोपों को चुनौती दी
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चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही बहस के बीच 124 रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक खुला पत्र लिखकर चुनावी व्यवस्था का बचाव किया। पत्र में उन्होंने धांधली के आरोपों के पीछे भरोसेमंद सबूत की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और वर्तमान चुनावी सुरक्षा उपायों को उजागर किया।
पत्र के मुख्य बिंदु
- वोटर लिस्ट के SIR में 22 लाख मृत वोटरों, 7 लाख डुप्लीकेट एंट्री और 21.5 लाख नए वोटरों की पहचान हुई।
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) सीलिंग, स्ट्रांग‑रूम सुरक्षा, वोटर‑वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) सहित कई तकनीकी उपाय लागू हैं।
- बूथ‑कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स में पैसे डालने और चुनावी हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
- 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कोई री‑पोलिंग नहीं हुई और 1951 के बाद सबसे अधिक वोटिंग दर्ज हुई।
- पत्र पर हस्ताक्षर में पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व IAS अधिकारी आर डी कपूर, समीरेंद्र चटर्जी, गोपाल कृष्ण, विवेक भारद्वाज और नवनीत सहगल शामिल हैं।
सिस्टम की सुरक्षा और पारदर्शिता
पत्र में बताया गया कि वर्तमान चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लागू हैं। पोलिंग एजेंटों की नियुक्ति, EVM की सीलिंग, स्ट्रांग‑रूम में मतदान मशीनों की निगरानी और VVPAT के माध्यम से कागजी प्रमाणन, सभी मिलकर वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हैं। इसके अलावा, SIR के दौरान नोटिस, सुनवाई, अपील और राजनीतिक पार्टियों के बूथ‑लेवल एजेंटों की भागीदारी को अनिवार्य किया गया, जिससे प्रक्रिया में सभी हितधारकों को आवाज़ मिलती है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR की वैधता की पुष्टि की है और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों (एक्स्ट्रा सेफगार्ड) को मंजूरी दी है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को चुनाव के अधिकार के तहत उचित ठहराया, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
धांधली के आरोपों पर सवाल
पूर्व अधिकारियों ने कहा, “कोई सिस्टम जीतने पर ईमानदार और हारने पर धांधली वाला नहीं हो सकता।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केंद्र में सत्ता संभालने के बाद कई राज्य चुनाव हारें और 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले बहुमत नहीं हासिल किया। यह तथ्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को समर्थन देता है।
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पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है, पर आरोप लगाने वाले को अपने दावे को साबित करना चाहिए। उन्होंने आलोचकों से कहा, “अगर जिस सिस्टम को आप धांधली वाला कहते हैं, वही आपको जीत दिलाता है, तो खुद से पूछें कि क्या आपको सिस्टम पर शक है, या सिर्फ नतीजे पर।”
निष्कर्ष
124 रिटायर्ड अधिकारियों का यह खुला पत्र चुनाव आयोग की संस्थागत सुरक्षा, तकनीकी उपायों और प्रक्रिया की पारदर्शिता को उजागर करता है। उन्होंने SIR को मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक बताया और धांधली के आरोपों के लिए ठोस सबूत की मांग की। इस प्रकार, भारतीय लोकतंत्र की नींव पर भरोसा बनाए रखने के लिए संस्थागत सुरक्षा और नागरिक जागरूकता दोनों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।




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