छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 11 महीने बाद दो ड्रग इंस्पेक्टर्स की बहाली, 26 बच्चों की मौत के बाद सवाल उठे
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छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 26 बच्चों की मौत के बाद दो ड्रग इंस्पेक्टर्स को निलंबित किया गया था, परंतु 11 महीने बाद 23 सितंबर को उनका पुनः पदस्थापन किया गया। इस निर्णय ने जांच प्रक्रिया, प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक जवाबदेही पर तीखी बहस छेड़ दी है।
कांड का पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 2024 में एक कफ सिरप के सेवन के बाद 26 बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल दो ड्रग इंस्पेक्टर्स – गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन – को निलंबित कर दिया। दोनों को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया था और उनके खिलाफ विभागीय तथा STF (सुपर टास्क फोर्स) की जांच चल रही थी।
बहाली का आदेश
जांच के बीच 23 सितंबर को दोनों अधिकारियों की बहाली का आदेश जारी किया गया। गौरव शर्मा को गुना में उप‑संचालक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FSSA) और शरद कुमार जैन को जबलपुर में उप‑संचालक नियुक्त किया गया। यह निर्णय तब आया जब अभी तक विभागीय और STF की जांच पूरी नहीं हुई थी।
सरकारी प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि उन्हें इस बहाली की जानकारी नहीं थी और यह शासन की पूर्व सहमति के बिना किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की पुनः जांच का आदेश दिया और जिम्मेदार अधिकारियों को कारण‑बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
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राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट उत्तर माँगा। उन्होंने पूछा कि जब जांच पूरी नहीं हुई है तो निलंबित अधिकारियों की बहाली क्यों की गई और इस निर्णय की जवाबदेही किसकी होगी। कांग्रेस के बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि इस कांड में तीसरे निलंबित अधिकारी – डिप्टी ड्रग कंट्रोलर शोभित कोष्ठा – की बहाली की फाइल भी शासन तक पहुंची है।
मुख्य बातें
- छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 26 बच्चों की मौत हुई।
- गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया।
- विभागीय और STF की जांच अभी भी चल रही है।
- 23 सितंबर को दोनों अधिकारियों की बहाली का आदेश जारी।
- गौरव शर्मा को गुना में उप‑संचालक, FSSA; शरद कुमार जैन को जबलपुर में उप‑संचालक बनाया गया।
- स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने बहाली की जानकारी न होने और कारण‑बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
- कांग्रेस ने सरकार से पूछताछ की, जांच पूरी न होने पर बहाली के कारणों की माँग की।
आगे की संभावनाएँ
जांच के परिणामों के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई या पुनः पदस्थापन की संभावना बनी हुई है। यदि जांच में कफ सिरप के उत्पादन, वितरण या नियामक लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो यह मामला स्वास्थ्य प्रशासन की निगरानी प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर सकता है। साथ ही, राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक प्रतिक्रिया के आधार पर सरकार को इस निर्णय की पुनः समीक्षा करने की संभावना भी है।
निष्कर्ष
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड ने बच्चों की सुरक्षा, नियामक निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों को उजागर किया है। निलंबित अधिकारियों की बहाली ने जांच प्रक्रिया के साथ टकराव पैदा किया, जिससे सरकार, विपक्ष और जनता के बीच तीखी बहस चल रही है। आगे की जांच के परिणाम ही इस विवाद का अंतिम समाधान तय करेंगे।




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