सेंट्रल विस्टा मस्जिद विवाद पर इमरान मसूद ने उठाए धर्मनिरपेक्षता के सवाल
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सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत एक पुरानी मस्जिद को हटाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस कदम को “धर्मनिरपेक्षता के साथ खिलवाड़” कहा और सवाल उठाया कि आज मस्जिद हटाई जाए तो कल मंदिरों का क्या होगा।
इमरान मसूद की मुख्य टिप्पणी
इमरान मसूद ने कहा, “आज मस्जिद हटा रहे हो, कल ये जो मंदिर बने हुए हैं इन जगहों पर, इन मंदिरों को ढाने का कोर्ट ने आदेश कर दिया फिर क्या करोगे?” उन्होंने यह भी कहा कि “ऐसा नहीं हो सकता कि मुसलमानों के लिए कोई और कानून हो और दूसरों के लिए कोई और”। सांसद ने यह प्रश्न भी उठाया कि “कौन सा थाना ऐसा है जिसमें मंदिर नहीं बना हुआ?”
धर्मनिरपेक्षता और समानता पर चिंता
मसूद ने इस प्रस्ताव को देश में आस्थाओं के साथ खिलवाड़ माना और कहा कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी धार्मिक स्थलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, चाहे वह मस्जिद हो या मंदिर।
सेंट्रल विस्टा परियोजना की पृष्ठभूमि
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कई सार्वजनिक स्थानों में पुनर्विकास कार्य चल रहा है। इस प्रक्रिया में कुछ पुराने धार्मिक इमारतों को हटाने या पुनर्निर्माण की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय समुदायों में असंतोष उत्पन्न हुआ है।
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मुख्य बातें
- कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सेंट्रल विस्टा के तहत मस्जिद हटाने के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
- उन्होंने इसे धर्मनिरपेक्षता के साथ खिलवाड़ कहा और समानता के सिद्धांतों पर सवाल उठाए।
- मसूद ने कहा, “आज मस्जिद हटा रहे हो, कल मंदिरों का क्या होगा?” और “कौन सा थाना ऐसा है जिसमें मंदिर नहीं बना हुआ?”
- सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कई सार्वजनिक स्थानों में पुनर्विकास चल रहा है, जिसमें धार्मिक इमारतों का पुनर्स्थापन भी शामिल है।
आगे की संभावनाएँ
इमरान मसूद की इस टिप्पणी के बाद, विपक्षी दलों और विभिन्न धार्मिक संगठनों से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाएगी और क्या पुनर्विकास के दौरान सभी धार्मिक समुदायों के हितों को समान रूप से ध्यान में रखा जाएगा।




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