बिहार सरकार जीविका समूहों को शासन में भागीदारी देने की तैयारी: दोगुना रोजगार‑दोगुनी आय का लक्ष्य
3 मिनट में पढ़ें

बिहार सरकार ने जीविका समूहों को शासन में भागीदारी देने की सिफारिश की है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार नेटवर्क को विकास कार्यों में जोड़ने की योजना है। यह कदम दोगुना रोजगार‑दोगुनी आय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयार की गई व्यापक नीति का हिस्सा है।
जीविका समूहों की मौजूदा स्थिति
बिहार में 13 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सक्रिय हैं, जिनमें 1.4 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रत्येक समूह में 10‑15 सदस्य होते हैं, जो बचत और कम ब्याज पर आपसी ऋण प्रदान करते हैं। एक जीविका दीदी औसतन 10‑25 हजार रुपये महीना कमाती है, और समूहों ने अब तक लगभग 34 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया है। सरकार इस नेटवर्क को डेढ़ करोड़ सदस्यों तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखती है।
कमेटी की प्रमुख सिफारिशें
नवीन कुमार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट में प्रमुख सिफारिशें प्रस्तुत कीं:
- जीविका समूहों को शासन में भागीदारी देने पर विचार करना।
- छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के विस्तार के लिए विशेष नीति बनाना।
- उद्योग स्थापना प्रक्रिया को सरल बनाकर जिला‑प्रमंडल स्तर पर मंजूरी देना।
- हर जिले की क्षमता के अनुसार अलग‑अलग विकास योजना तैयार करना।
- अगले पाँच साल में जीएसडीपी विकास दर को कम से कम 16% बनाए रखना।
शासन में भागीदारी के संभावित क्षेत्र
कमेटी का मानना है कि जीविका समूहों की पहुंच और नेटवर्क का उपयोग कृषि, जल प्रबंधन, बिजली, संचार और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि महिलाओं की सामाजिक‑आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
आपके लिए संबंधित खबरें
छोटे उद्योगों का महत्व
बिहार ने पिछले दो दशकों में औसत विकास दर 13.7% और वित्त वर्ष 2022‑23 में 17.9% की वृद्धि दर्ज की है। कमेटी ने कहा कि दोगुना रोजगार‑दोगुनी आय लक्ष्य के लिए केवल बड़े उद्योगों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा; छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर इन उद्योगों से रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न होंगे।
जिला‑विशिष्ट योजनाओं की आवश्यकता
हर जिले की आर्थिक गतिविधियां अलग‑अलग हैं, इसलिए कमेटी ने प्रत्येक जिले के लिए उसकी जरूरत और क्षमता के अनुसार योजना बनाने की सिफारिश की। यह दृष्टिकोण विकास असमानता को कम करने और निवेश को संतुलित रूप से वितरित करने में मदद करेगा।
आगामी बजट में फंड की संभावना
डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार कमेटी की रिपोर्ट पर अमल करेगी और आगामी बजट में इस पहल के लिए विशेष फंड का इंतजाम किया जाएगा। आंकड़ों के आधार पर सभी जिलों की निगरानी की जाएगी, जिससे नीतियों की प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
मुख्य बातें
- बिहार में 13 लाख से अधिक जीविका समूह, 1.4 करोड़ से अधिक महिला सदस्य।
- कमेटी ने जीविका समूहों को शासन में भागीदारी देने की सिफारिश की।
- छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के विस्तार के लिए विशेष नीति बनाना।
- अगले पाँच साल में जीएसडीपी विकास दर को कम से कम 16% बनाए रखना।
- हर जिले के लिए अलग‑अलग विकास योजना तैयार करना।
- आगामी बजट में इस पहल के लिए विशेष फंड का प्रावधान।




टिप्पणियाँ
0