आजम खान पर ED का नया मनी लॉन्ड्रिंग केस: जौहर यूनिवर्सिटी में 416 करोड़ का अंतर
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जैसे-जैसे जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ रही है, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत नया केस दर्ज किया। यह कार्रवाई पिछले दिन हुई छापेमारी के बाद की गई, जिसमें निर्माण लागत और आयकर रिटर्न में घोषित खर्च के बीच 416.14 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर सामने आया।
केस की पृष्ठभूमि
ED ने रामपुर के अजीमनगर थाने में अपने निदेशक की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कराई थी। उसी FIR को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ECIR (Economic Crime Investigation Report) दर्ज किया गया। FIR में भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5), 318(4) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(d), 13(2) लागू की गई हैं।
निर्माण लागत बनाम घोषित खर्च
ED के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों की अनुमानित निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये है, जबकि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया है। इस अंतर को 416.14 करोड़ रुपये बताया गया है, जो संभावित मनी लॉन्ड्रिंग का संकेत देता है।
सरकारी धन और सामग्री के उपयोग पर आरोप
ED ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी ठेके और सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, ठेकेदारों के माध्यम से लगभग 55.8 करोड़ रुपये, सरकारी कार्यों के तहत 23.41 करोड़ रुपये और विधायक/विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए। साथ ही ट्रस्ट को मिले कुछ दानों की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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जुड़े हुए पक्ष और आगे की जांच
FIR में आजम खान, जौहर ट्रस्ट, ठेकेदारों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। ED इस मामले को पहले से चल रही जांच के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएगी, जिसमें निर्माण लागत, घोषित खर्च, सरकारी कार्यों से जुड़े भुगतान और ट्रस्ट को मिले दानों की जांच प्रमुख होगी। एजेंसी का फोकस यह पता लगाना है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन और सामग्री का स्रोत क्या था और क्या किसी प्रकार की अवैध कमाई या सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।
मुख्य बातें
- ED ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया।
- निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये, जबकि ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये ही दिखाया – अंतर 416.14 करोड़ रुपये।
- सरकारी ठेके और निधियों से कुल 86.81 करोड़ रुपये का उपयोग करने का आरोप।
- FIR में BNS धारा 61, 316(5), 318(4) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(d), 13(2) लागू।
- जांच को पहले से चल रही जांच के साथ जोड़ा जाएगा।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, आजम खान और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।




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