सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स के घर खरीदारों को राहत दी, मालिकाना हक के दस्तावेज़ जारी करने की अनुमति
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सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स के प्रोजेक्ट में फंसे घर खरीदारों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। कोर्ट ने उन खरीदारों को, जिन्होंने फ्लैट का कब्जा ले लिया है, लेकिन अभी तक मालिकाना हक के दस्तावेज़ नहीं प्राप्त किए हैं, कन्वेयंस डीड (मालिकाना हक हस्तांतरण) जारी करने की अनुमति दी। यह निर्णय कई सालों से चल रहे विवाद को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कानूनी राहत और दस्तावेज़ जारी करने की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ जारी करने की अनुमति केवल उन खरीदारों के लिए है, जिनका आवंटन वैरिफिकेशन हो चुका है और जिन्होंने फ्लैट का वास्तविक कब्जा ले लिया है। यह अनुमति किसी तीसरे पक्ष के अधिकार स्थापित करने के लिए उपयोग नहीं की जा सकती। कोर्ट ने 13 जुलाई को खातों को फ्रीज करने के अपने पुराने आदेश में भी राहत प्रदान की।
वित्तीय प्रस्ताव और रिफंड की मांग
पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने घर खरीदारों को रिफंड और सौदे को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, खरीदारों का मानना है कि उनके मुद्दों के समाधान के लिए कम से कम 2,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। दूसरी ओर, 5,179 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों वाले छह संस्थागत लेनदार दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) जारी रखने के पक्ष में हैं।
परियोजनाओं की प्रगति स्थिति
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने बताया कि पार्श्वनाथ की विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति समान नहीं है। कुछ प्रोजेक्ट 70% से 90% तक पूर्ण हो चुके हैं, जबकि कुछ में बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं हैं और कुछ पूरी तरह अधूरी या केवल कागज़ी रूप में मौजूद हैं। कोर्ट इस बात पर भी विचार कर रहा है कि दिवालिया प्रक्रिया से बाहर की कंपनियों की संपत्तियों का उपयोग करके खरीदारों को राहत दी जा सकती है या नहीं।
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पृष्ठभूमि: विवाद की शुरुआत
पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने दिल्ली‑NCR सहित कई शहरों में रिहायशी प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे। कई खरीदारों ने लाखों‑करोड़ों रुपये जमा किए, लेकिन कई प्रोजेक्ट समय पर पूर्ण नहीं हो पाए। कुछ मामलों में निर्माण अधूरा रह गया, जबकि कुछ में कब्जा मिलने के बाद भी दस्तावेज़ों का इंतजार करना पड़ा। 2021 में खरीदारों ने हरियाणा RERA का दरवाजा खटखटाया, जहाँ बिल्डर को 9.3% वार्षिक ब्याज देने का निर्देश मिला, परन्तु राहत प्राप्त करने में कठिनाई बनी रही। यह मामला जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, जहाँ बिल्डर और सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने कब्जा प्राप्त खरीदारों को कन्वेयंस डीड जारी करने की अनुमति दी।
- दस्तावेज़ जारी करने के लिए आवंटन का वैरिफिकेशन अनिवार्य है।
- पार्श्वनाथ ने रिफंड के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा, जबकि खरीदारों को 2,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई।
- कई प्रोजेक्ट 70‑90% तक पूर्ण, कुछ अधूरी या केवल कागज़ी रूप में।
- CIRP प्रक्रिया में 5,179 करोड़ रुपये के दावे वाले छह संस्थागत लेनदार शामिल।
सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत से घर खरीदारों को दस्तावेज़ प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज़ होगी, परन्तु अंतिम समाधान के लिए वित्तीय प्रस्ताव और दिवालिया प्रक्रिया के आगे के निर्णयों का इंतजार रहेगा।




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