रेस कोर्स मस्जिद पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का आश्वासन
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दिल्ली हाईकोर्ट में रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित मस्जिद को गिराने की आशंका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मौखिक आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक मस्जिद पर कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। यह आश्वासन अदालत में प्रस्तुत वकील द्वारा दिया गया, जबकि मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित है।
याचिका का पृष्ठभूमि
याचिका सैयद अहमद सऊद की ओर से दायर की गई थी। उनके वकील एम. सूफियान सिद्दीकी ने कोर्ट को बताया कि रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित मस्जिद को गिराने का खतरा है और मस्जिद तक पहुँचने में बाधाएँ उत्पन्न की जा रही हैं, जिससे नमाज़ पढ़ने वाले लोग वहाँ नहीं पहुँच पा रहे हैं।
मस्जिद की कानूनी स्थिति
मस्जिद को 1977 में सरकारी गजट के माध्यम से वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया था। इसके अतिरिक्त, 10 अक्टूबर 2009 के नोटिफिकेशन के तहत इसे ग्रेड‑II विरासत स्थल (Heritage Site) की मान्यता भी मिली है। विरासत स्थल की स्थिति के कारण किसी भी परिवर्तन के लिए हेरिटेज कमेटी की विशेष अनुमति आवश्यक है, जिससे मस्जिद को गिराने की किसी भी कार्रवाई पर कानूनी प्रश्न उठते हैं।
बिजली‑पानी कटौती और तोड़फोड़ की आशंका
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर में चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई के बीच मस्जिद की बिजली और पानी की सुविधाएँ बंद कर दी गई हैं, जिससे धार्मिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि यह उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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वक्फ बोर्ड का प्रतिनिधित्व
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 19 अक्टूबर को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष इस मामले में प्रतिनिधित्व दिया था, परन्तु अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। याचिकाकर्ता ने L&DO और दिल्ली वक्फ बोर्ड को दो अलग‑अलग प्रतिनिधित्व सौंपे हैं।
केंद्र सरकार का बयान
केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि रेस कोर्स परिसर में चल रही तोड़फोड़ के कारण मस्जिद में आने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली और पानी की आपूर्ति बंद की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर में एक मंदिर भी स्थित है और उसके संबंध में भी निर्देश प्राप्त किए जाएंगे। अदालत से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया, परन्तु मौखिक आश्वासन दिया गया कि अगली सुनवाई तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।
मुख्य बातें
- सैयद अहमद सऊद की ओर से दायर याचिका में रेस कोर्स मस्जिद को गिराने की आशंका जताई गई।
- मस्जिद 1977 में वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित और 2009 में ग्रेड‑II विरासत स्थल घोषित।
- केंद्रीय सरकार ने मौखिक आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक मस्जिद पर कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।
- मस्जिद की बिजली‑पानी कटौती को तोड़फोड़ की कार्रवाई का हिस्सा बताया गया।
- मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित, जहाँ संबंधित पक्षों की दलीलें सुनी जाएँगी।
आगे की कार्यवाही
जस्टिस अनीश दयाल की पीठ ने मामले की सुनवाई गुरुवार के लिए तय की है। अदालत में केंद्र सरकार, दिल्ली वक्फ बोर्ड, L&DO और याचिकाकर्ता के प्रतिनिधियों को अपने‑अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यदि अदालत को कोई अनियमितता या कानूनी उल्लंघन प्रतीत होता है, तो वह आवश्यक आदेश जारी कर सकती है, जिसमें विरासत स्थल की सुरक्षा, वक्फ संपत्ति के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा शामिल होगी।
इस विवाद का निपटारा न केवल धार्मिक समुदायों के बीच शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वक्फ संपत्तियों और विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए भी एक कानूनी मिसाल स्थापित कर सकता है।




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