ग्राम प्रहरी के मानदेय में 40% वृद्धि, 68,000 प्रहरियों को दी दिवाली की सौगात
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 अक्टूबर को बरेली पुलिस लाइन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में लगभग 68,000 ग्राम प्रहरी को सम्मानित किया और उनके मानदेय में 40 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी की घोषणा की। यह कदम दिवाली से ठीक पहले आया, जिससे कई ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत मिली।
ग्राम प्रहरी का इतिहास और नया नाम
ग्राम प्रहरी का पद 1873 के ग्राम पुलिस अधिनियम के तहत स्थापित हुआ था, जब ब्रिटिश सरकार ने इसे ग्रामीण सुरक्षा का विस्तार माना। वर्षों में इस पद को अक्सर “ग्राम चौकीदार” कहा जाता रहा, पर 5 जनवरी 2018 को वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इसे “ग्राम प्रहरी” का नया नाम दिया। नाम परिवर्तन का उद्देश्य इस पद को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि सुरक्षा का सम्मानित स्तंभ बनाना था।
मानदेय में दो बार की वृद्धि
पहली बार 2018 में मानदेय को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये किया गया था। अब योगी सरकार ने फिर से मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि कर कुल 3,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया। यह 40% की वृद्धि सालभर में प्रत्येक प्रहरी को अतिरिक्त 12,000 रुपये का लाभ देती है।
आर्थिक प्रभाव
- प्रति माह अतिरिक्त खर्च: लगभग 7 करोड़ रुपये
- वर्षिक अतिरिक्त खर्च: लगभग 84 करोड़ रुपये
- बजट में यह राशि अनुपूरक बजट के तहत आवंटित की जाएगी
दिवाली की सौगात और अतिरिक्त लाभ
मानदेय वृद्धि के साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को सालाना पाँच लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा कवर देने का वादा किया। यह कदम ग्रामीण सुरक्षा कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया।
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ग्राम प्रहरी की भूमिका और महत्व
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रहरियों को “पुलिस की तीसरी आंख” कहा है। वे गांव में किसी भी अजनबी की आगमन, विवाद, चोरी या बड़ी वारदात की सूचना तुरंत थाने तक पहुंचाते हैं। चाहे मौसम कोई भी हो, वे रात-रात जागरूक रहते हैं और गांव व थाने के बीच सेतु का काम करते हैं।
आधुनिक चुनौतियों में प्रहरी की जरूरत
आज अपराध के तरीके बदल चुके हैं—साइबर ठगी, अवैध शराब व्यापार, धर्मांतरण की संदिग्ध गतिविधियां आदि। इन सभी की पहली सूचना अक्सर वही ग्रामीण प्रहरी देता है, क्योंकि वे गांव की हर गली, हर चेहरे को पहचानते हैं।
मुख्य बातें
- 68,000 ग्राम प्रहरी को सम्मानित किया गया।
- मानदेय 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया (40% वृद्धि)।
- सालाना अतिरिक्त लाभ: 12,000 रुपये प्रति प्रहरी।
- सरकारी बजट में अतिरिक्त 84 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- प्रहरी और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा कवर दिया जाएगा।
- ग्राम प्रहरी को “पुलिस की तीसरी आंख” के रूप में मान्यता मिली।
सरकारी नीति में निरंतरता
ग्राम प्रहरियों की मानदेय वृद्धि उत्तर प्रदेश सरकार की व्यापक राहत नीति का हिस्सा है। पिछले महीनों में मिड-डे मील रसोइयों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत सहायकों और पीआरडी जवानों के मानदेय में भी समान वृद्धि की गई है। यह दर्शाता है कि सरकार निचली कड़ी के कर्मचारियों को क्रमिक रूप से आर्थिक समर्थन दे रही है।
निष्कर्ष
ग्राम प्रहरी का पद अब केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि ग्रामीण सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा माना जा रहा है। मानदेय में इस बड़ी वृद्धि और स्वास्थ्य कवरेज की घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस वर्ग को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा दोनों प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम न केवल ग्रामीण सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ग्रामीण समुदाय में भरोसे और आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा।




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