चुनाव आयोग के बार-बार बदलते फैसले: वोटर लिस्ट कैंप और फॉर्म नियमों पर उठे सवाल
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अंदरूनी मतभेदों की खबरों के बाद, चुनाव आयोग (ECI) ने मात्र 30 दिनों में कई बड़े फैसलों को उलट दिया है। इस बदलाव ने विपक्षी पार्टियों, नागरिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच तीव्र बहस को जन्म दिया है, जहाँ सवाल उठ रहे हैं कि आयोग अपने ही निर्णयों से पीछे हट रहा है या मतदाताओं की सुविधा के लिए नए कदम उठा रहा है।
वोटर लिस्ट कैंप का विस्तार
चुनाव आयोग ने बंगाल के सभी 24 जिलों में एक विशेष वोटर लिस्ट कैंप शुरू किया है। इस कैंप के तहत प्रत्येक निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। इसी तरह, दिल्ली में भी नई निर्देशावली जारी की गई है, जहाँ SIR (Special Incremental Revision) के दौरान 33 लाख मतदाताओं को नोटिस मिला, जिनमें से लगभग 20 लाख का निपटारा किया गया है। शेष मामलों को भी तेज़ी से निपटाने की प्रक्रिया चल रही है।
BLO द्वारा दस्तावेज़ संग्रह
नए निर्देशों के अनुसार, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अब मतदाता के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र करेंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। दिल्ली में 18 और 25 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ मतदाताओं को सीधे ERO या AERO के दफ़्तर में बुलाए बिना सहायता मिलेगी।
फॉर्म‑6 और डिक्लेरेशन फॉर्म में बदलाव
SIR के दौरान फॉर्म‑6 के साथ अतिरिक्त डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि डिक्लेरेशन फॉर्म की मंजूरी नहीं ली गई थी। परिणामस्वरूप, चुनाव आयोग ने डिक्लेरेशन फॉर्म को हटाकर फॉर्म‑6 को पहले की तरह ही लागू कर दिया। अब SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में केवल मूल फॉर्म‑6 ही भरना होगा।
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फॉर्म‑7 पर नई सीमा
फॉर्म‑7 वह दस्तावेज़ है जिसका उपयोग मतदाता अपनी नाम को वोटर लिस्ट से हटवाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए करते हैं। पहले इसकी संख्या पर कोई स्पष्ट सीमा नहीं थी, विशेषकर ऑफलाइन आवेदन में कोई लिमिट नहीं थी। नई नियमावली के तहत:
- SIR के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म‑7 जमा कर सकता है।
- सामान्य दिनों में एक महीने में अधिकतम 5 फॉर्म‑7 जमा किए जा सकते हैं।
- आवेदन की जांच के बाद, यदि आवश्यक हो तो मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
फॉर्म‑7 को लेकर फर्जीवाड़े के दावे
कर्नाटक में हाल ही में फॉर्म‑7 के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, जिसकी जांच अभी चल रही है। इस घटना ने नई सीमा के प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोग इन बदलावों को अपनी रणनीति में नरमी के रूप में देख रहा है।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद 30 दिनों में कई प्रमुख फैसले उलटे गए।
- बंगाल के 24 जिलों में वोटर लिस्ट कैंप शुरू, दिल्ली में विशेष शिविरों की योजना।
- BLO अब घर जाकर दस्तावेज़ एकत्र करेंगे और ECINet पर अपलोड करेंगे।
- फॉर्म‑6 से डिक्लेरेशन फॉर्म हटाया गया, अब केवल मूल फॉर्म‑6 ही लागू।
- फॉर्म‑7 पर नई सीमा: SIR में 10, सामान्य में 5 प्रति माह।
- कर्नाटक में फॉर्म‑7 के दुरुपयोग के आरोप, जांच जारी।
इन बदलावों के प्रभाव को लेकर अभी स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, परन्तु यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग को अपने निर्णयों में स्थिरता और पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।




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