धर्मेंद्र कश्यप ने BJP से दिया इस्तीफा, राज्यसभा टिकट न मिलने पर टाटा‑बाय‑बाय पोस्ट
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आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा के लिए टिकट न मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा दे दिया। यह कदम 7 अक्टूबर को उन्होंने “टाटा बाय‑बाय” शब्दों के साथ फेसबुक पर पोस्ट कर सार्वजनिक किया, जिससे उनके असंतोष की पुष्टि हुई।
राज्यसभा टिकट न मिलने की पृष्ठभूमि
बिहार‑उत्तरी प्रदेश के बरेली क्षेत्र से जुड़े कश्यप को BJP ने 2026 के राज्यसभा चुनाव में अपने 8 उम्मीदवारों में से नहीं चुना। पार्टी ने उनके क्षेत्र से दो अन्य चेहरों – धर्मपाल सिंह (योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री) और श्रुति गंगवार (पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी) – को टिकट दिया। कश्यप ने इस निर्णय पर निराशा व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर “टाटा बाय‑बाय” लिखा, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी का नाम नहीं लिया।
पिछला राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र कश्यप ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में क्रमशः पहली और दूसरी बार आंवला सीट जीतकर अपनी लोकप्रियता स्थापित की। 2024 के चुनाव में वह हार का सामना कर चुके थे, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य में अनिश्चितता बढ़ी।
इस्तेफे के बाद की स्थिति
इस्तेफे की घोषणा के बाद कश्यप ने BJP छोड़ने की स्पष्ट बात नहीं कही, परंतु उनका बयान “आंखों में रहा, दिल में उतरकर नहीं देखा” संकेत देता है कि वह पार्टी के भीतर से निराश हैं। यह इस्तीफा उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के कुछ महीने पहले आया है, जिससे पार्टी के भीतर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
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अन्य नेताओं में असंतोष
धर्मेंद्र कश्यप के साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार में भी असंतोष दिखा। उनके बेटे विकास किशोर, जो BJP अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, ने सोशल मीडिया पर परिवार में मान‑सम्मान न मिलने पर टिप्पणी की। कौशल किशोर को 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था और राज्यसभा के लिए उनका नाम भी चर्चा में था, परंतु पार्टी ने अवध क्षेत्र से पासी समाज की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को टिकट दिया।
मुख्य बातें
- धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा टिकट न मिलने पर BJP से इस्तीफा दिया।
- 7 अक्टूबर को उन्होंने फेसबुक पर “टाटा बाय‑बाय” पोस्ट कर असंतोष जताया।
- बरेली क्षेत्र से BJP ने धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को टिकट दिया।
- कश्यप ने 2014 और 2019 में आंवला सीट दो बार जीती, 2024 में हार का सामना किया।
- इस्तेफे के समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव निकट है।
- कौशल किशोर के परिवार में भी राज्यसभा टिकट न मिलने पर असंतोष देखा गया।




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