यूपी में ‘बीमारू राज्य’ से ‘डिजिटल इंजन’ तक: CM योगी ने पूर्व सरकार पर निशाना साधा
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लखनऊ में HCL टेक की स्थापना के दस साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विकसित भारत‑विकसित यूपी’ के संकल्प को दोहराते हुए राज्य की तकनीकी प्रगति को उजागर किया। उन्होंने 2017‑पूर्व की स्थिति को ‘बीमारू राज्य’ कहकर पूर्व सरकार की नीतियों की आलोचना की और वर्तमान में चल रहे बड़े निवेश एवं स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम का उल्लेख किया।
मुख्य आँकड़े और निवेश
CM योगी ने बताया कि जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की लागत वाली HCL‑Foxconn चिप इकाई का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा 644 मेगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर के प्रस्ताव पहले ही मंजूर हो चुके हैं। राज्य में अब 24,000 से अधिक स्टार्ट‑अप और 8 यूनिकॉर्न कंपनियों का उदय हुआ है, जिससे तकनीकी उत्पादन‑सेवा चक्र में तेज़ी आई है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ‑साढ़े साल में उत्तर प्रदेश ने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन में लगभग 60 % और 55 % की हिस्सेदारी हासिल की है। यह वृद्धि मोबाइल‑से‑मॉड्यूल‑से‑माइक्रोचिप की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को प्रदेश के भीतर लाने में मददगार साबित हुई है। डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के साथ एआई‑सिटी की योजना भी तैयार हो रही है, जिससे भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार हो रहा है।
पूर्व सरकार की नीतियों पर टिप्पणी
योगी ने स्पष्ट किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘परिवारवाद’ और ‘सैफई महोत्सव’ जैसी सांस्कृतिक‑आधारित नीतियों पर अधिक ध्यान दिया जाता था, जबकि वास्तविक औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक नीति‑निर्माण और निवेश संरक्षण नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा?” इस संदर्भ में उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों को ‘बीमारू’ शब्द से संबोधित किया।
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डबल इंजन सरकार का विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने नीति, निवेश और उत्पादन के तीन स्तंभों से जोड़कर जमीन पर उतारा है। इस दृष्टिकोण से प्रदेश में तकनीकी उद्यमिता, डेटा‑सेंटर और एआई‑आधारित सेवाओं का विकास तेज़ी से हो रहा है।
युवा और रोजगार पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई‑प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बढ़ते स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम ने न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाकर आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज वह निर्माता बन रहा है।”
मुख्य बातें
- जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL‑Foxconn चिप इकाई का निर्माण जारी।
- 644 मेगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर के प्रस्ताव मंजूर।
- राज्य में 24,000 से अधिक स्टार्ट‑अप और 8 यूनिकॉर्न कंपनियां।
- मोबाइल फोन उत्पादन में 60 % और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में 55 % हिस्सेदारी।
- एआई‑प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य।
- पूर्व सरकार को ‘बीमारू राज्य’ कहकर नीतियों की कमी की ओर इशारा।
इन बयानों से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि‑आधारित राज्य नहीं रहकर तकनीकी उत्पादन, डेटा‑सेंटर और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम के केंद्र में बदल रहा है। भविष्य में एआई‑सिटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के साथ राज्य की आर्थिक स्थिति में और भी उल्लेखनीय बदलाव की उम्मीद की जा रही है।




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