53 साल के राणा हरपिंदर पाल सिंह ने अकेले Activa पर 2,342 किमी का हिमालयी सफर पूरा किया
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53 साल की उम्र, एक Activa और अटूट देशभक्ति के साथ फिरोजपुर के राणा हरपिंदर पाल सिंह ने 23 सितंबर को शुरू किया एक अद्भुत यात्रा, जो 5 अक्टूबर को फिरोजपुर में समाप्त हुई। अकेले 2,342 किमी की दूरी तय करते हुए उन्होंने हिमालय के कठिन पहाड़ी रास्तों को पार किया, भारत के आखिरी गांव थांग तक पहुँचे और तिरंगा फहराकर नशा‑मुक्त जीवन का संदेश दिया।
यात्रा का मार्ग और प्रमुख पड़ाव
राणा साहब ने अपनी सोलो सफर की शुरुआत फिरोजपुर से की और क्रमशः निम्नलिखित स्थानों से गुज़रे:
- पठानकोट
- जम्मू
- श्रीनगर
- सोनमर्ग
- जोजिला पास
- द्रास
- कारगिल
- बटालिक सेक्टर
- लामायुरु
- लेह
- खारदुंग ला
- थांग (भारत का आखिरी गांव)
इन सभी स्थानों पर कठिन पहाड़ी रास्ते, बदलते मौसम और ऊँचाई की चुनौती थी, फिर भी राणा साहब ने अपने Activa पर निरंतर गति बनाए रखी।
मुख्य बातें
- सफ़र की कुल दूरी: 2,342 किमी
- प्रारम्भ तिथि: 23 सितंबर
- समापन तिथि: 5 अक्टूबर
- उम्र: 53 वर्ष
- वहां तक पहुँचा: भारत का आखिरी गांव थांग
- संदेश: नशा‑मुक्त जीवन और स्वस्थ जीवनशैली
- स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत: फिरोजपुर में वापसी पर बड़े पैमाने पर स्वागत
देशभक्ति और सामाजिक संदेश
थांग पहुँचते ही राणा हरपिंदर ने तिरंगा फहराया, जिससे स्थानीय लोगों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ। यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार नशा‑मुक्त जीवन, स्वस्थ आदतों और सकारात्मक सोच के महत्व पर ज़ोर दिया। उनका मानना था कि उम्र कोई बाधा नहीं, बल्कि हौसला और जज्बा ही सफलता की कुंजी है।
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स्थानीय प्रतिक्रिया और “हिमालयी वारियर” का सम्मान
5 अक्टूबर को फिरोजपुर लौटते समय राणा साहब का स्वागत गाँव के लोगों ने बड़े उत्साह के साथ किया। कई युवा और बुजुर्ग उनके साहस की सराहना करने लगे और उन्हें “हिमालयी वारियर” का खिताब दिया गया। इस सम्मान ने यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत साहस और सामाजिक जागरूकता दोनों ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
रिपोर्टर का नोट
यह रिपोर्ट सनी चोपड़ा द्वारा तैयार की गई है, जो यात्रा के दौरान राणा साहब के साथ कई बार मुलाकात कर उनके अनुभवों को सीधे सुनने का अवसर मिला।




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