पश्चिम बंगाल में 5 महीने में 2454 रेप और 600 हत्याएं: डेटा ने उजागर की कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति
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पश्चिम बंगाल में पिछले पाँच महीनों (मई‑सितंबर 2026) में रेप के 2,454 और हत्या के 600 मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा राज्य की कानून‑व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है और राजनीतिक बहस को भी गरमाता दिख रहा है।
RTI से प्राप्त आंकड़े
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने RTI के माध्यम से स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (SCRB) से डेटा मांगा। SCRB ने मई से 24 सितंबर 2026 तक के आंकड़े प्रदान किए, जिनमें प्रमुख अपराधों की विस्तृत संख्या शामिल है।
- रेप: कुल 2,454 मामले (मई‑349, जून‑389, जुलाई‑786, अगस्त‑459, सितंबर‑471)
- हत्या: कुल 600 मामले (मई‑125, जून‑134, जुलाई‑133, अगस्त‑111, सितंबर‑97)
- हत्या की कोशिश: 13,114 मामले
- गंभीर चोट पहुंचाने वाले मारपीट: 32,341 मामले
- कुल गंभीर अपराध (मई‑24 सितंबर 2026): 48,509 मामले
मुख्य बातें
- पाँच महीनों में औसतन 16 रेप केस प्रतिदिन दर्ज हुए।
- हर दिन लगभग 4 हत्या के मामले सामने आए।
- हत्या की कोशिश के 13,114 मामलों का मतलब है प्रतिदिन 87 प्रयास।
- गंभीर मारपीट के 32,341 मामलों से प्रतिदिन 216 घटनाएं हुईं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस डेटा को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह “डबल‑इंजन” सरकार की विफलता की झलक है और शुबेन्दु अधिकारी की सरकार ने केवल सत्ता के लिए कानून‑व्यवस्था को नज़रअंदाज़ किया है। बनर्जी ने इस बात को दोहराया कि “सिर्फ पाँच महीनों में रेप के 2,454 मामले” और “हर दिन औसतन 16 रेप केस” राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर गिरावट को दर्शाते हैं।
डेटा की सीमाएँ और आगे की जांच
RTI से प्राप्त आंकड़े केवल दर्ज मामलों की संख्या दिखाते हैं, लेकिन इन मामलों की प्रगति, जांच की स्थिति, गिरफ्तारी, आरोप पत्र और दोषसिद्धि की जानकारी नहीं देते। इसलिए, इन आँकड़ों को अंतिम निष्कर्ष तक नहीं ले जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध डेटा को अन्य रिपोर्टों—जैसे महिला पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी, झूठे मामलों के आरोप, धमकियों और राजनीतिक दावों—के साथ मिलाकर ही पूरी तस्वीर मिल सकती है।
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सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
शुबेन्दु अधिकारी सरकार ने अभी तक इन आंकड़ों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि, कई नागरिक समूह और मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कदम मांगें हैं, जिसमें पुलिस की तत्परता बढ़ाना, महिला सुरक्षा योजनाओं का सुदृढ़ीकरण और न्यायिक प्रक्रिया की तेज़ी शामिल है।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में पिछले पाँच महीनों में दर्ज हुए रेप और हत्या के आँकड़े न केवल अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं, बल्कि राज्य की कानून‑व्यवस्था पर गहरी चिंताएँ भी उत्पन्न करते हैं। डेटा की सीमाओं को देखते हुए, आगे की जांच, न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं ताकि नागरिकों को सुरक्षित माहौल प्रदान किया जा सके।




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