वाराणसी एमएलसी स्नातक खंड मतगणना पर बीजेपी का धरना, सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा आगे
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वाराणसी में एमएलसी स्नातक खंड की मतगणना जारी है और सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा प्रथम वरीयता के आठवें चक्र की गिनती के बाद 16,261 वोटों से आगे हैं। इस बीच, बीजेपी ने मतगणना प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए धरना दिया, जिससे चुनावी माहौल गरम हो गया।
मतगणना का वर्तमान परिदृश्य
वाराणसी एमएलसी स्नातक खंड में अब तक सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 47,450 वोट और बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 31,189 वोट मिले हैं। आशुतोष सिन्हा प्रथम वरीयता के आठवें चक्र की गिनती के बाद 16,261 वोटों से आगे चल रहे हैं।
बीजेपी का धरना और उसकी माँगें
बीते बुधवार की रात, बीजेपी के नेता, प्रत्याशी, प्रदेश सरकार के मंत्री, मेयर, विधायक और कार्यकर्ता मतदान स्थल पर धरना कर बैठे। उन्होंने पाँचवें राउंड की मतगणना दोबारा कराने की मांग की और निर्वाचन आयोग में आपत्ति दर्ज कराई। धरना पाँच घंटे तक चला और रात 9 बजे समाप्त हुआ।
मुख्य माँगें
- पाँचवें राउंड की पुनर्गणना की तत्काल व्यवस्था।
- ऑब्जर्वर प्रांजल यादव को बर्खास्त करने की मांग।
- बीजेपी एजेंटों की अनुपस्थिति के कारण हुई गिनती को अमान्य घोषित करना।
ऑब्जर्वर प्रांजल यादव को लेकर भ्रम
धरने के दौरान बीजेपी नेताओं ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर प्रांजल यादव के खिलाफ नारेबाजी की। लेकिन जब बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से पूछा गया कि जिस ऑब्जर्वर के खिलाफ वे धरने पर बैठे हैं, वह स्नातक खंड की गिनती के लिए ऑब्जर्वर नहीं है, तो उन्हें पता चला कि प्रांजल यादव शिक्षक खंड के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त थे और स्नातक खंड की गिनती में उनका कोई रोल नहीं था। इस तथ्य से बीजेपी के कई नेताओं में भ्रम उत्पन्न हुआ।
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पाँचवें राउंड की पुनर्गणना की संभावना
धरना समाप्त होने के बाद, बीजेपी को पाँचवें राउंड की पुनर्गणना का आश्वासन मिला। उन्होंने कहा कि पाँचवें राउंड की गिनती के समय बीजेपी के एजेंट मौजूद नहीं थे, जबकि केवल सपा के एजेंट मौजूद थे। इस कारण से उन्होंने पुनर्गणना की मांग को दोहराया।
निष्कर्ष
वाराणसी एमएलसी स्नातक खंड की मतगणना अभी जारी है और सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को स्पष्ट बढ़त मिल रही है। वहीं, बीजेपी का धरना और ऑब्जर्वर को लेकर उत्पन्न भ्रम चुनावी प्रक्रिया में तनाव को बढ़ा रहा है। चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई और संभावित पुनर्गणना ही इस संघर्ष का निर्णायक बिंदु बनेंगे।




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