उत्तराखंड कांग्रेस में विवाद: राहुल गांधी‑खरगे की बैठक में हरीश रावत को नहीं मिला न्योता
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राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 नवंबर को खरगे के आवास पर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के साथ 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की। इस अहम बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत दिखाए।
बैठक का विवरण
सोमवार, 2 नवंबर को खरगे के आवास पर आयोजित बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, राज्य इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत और अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करना था।
हाजिरी और अनुपस्थिति
सूत्रों के अनुसार, हरीश रावत को इस बैठक में बुलाया ही नहीं गया था। इस कारण से पार्टी के भीतर रावत के समर्थकों में असंतोष उत्पन्न हुआ और उनके अगले कदमों की प्रतीक्षा की जा रही है।
बैठक के प्रमुख निर्णय
- 4 नवंबर को कांग्रेस राज्य के सभी जिलों में भूमि घोटालों और धामी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।
- बैठक में मणिपुर के संबंध में पहले ही चर्चा हो चुकी थी, जबकि उत्तराखंड के नेताओं ने इस बार केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की।
हरीश रावत को लेकर उठे सवाल
पहले कुमारी शैलजा ने आलाकमान के निर्देश पर रावत की धन्यवाद और जनसंवाद रैलियों को रोक दिया था। अब इस बैठक में रावत को न बुलाने से पार्टी में नई टकराव की संभावना बन रही है। रावत के समर्थक इस कदम को पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन के बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
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खरगे का बीजेपी सरकार पर हमला
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर खरगे ने उत्तराखंड की बीजेपी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में बीजेपी ने जनता की उम्मीदों को धोखा दिया, ‘चरमराई कानून‑व्यवस्था’, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल, सत्ता का अहंकार और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति ने राज्य को निराश किया। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड की जनता अब हिसाब मांग रही है और बदलाव चाहती है। कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही है।”
मुख्य बातें
- राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 नवंबर को उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं के साथ 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की।
- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस बैठक में बुलाया नहीं गया, जिससे पार्टी में अंदरूनी विवाद की आशंकाएँ बढ़ी।
- बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, कुमारी शैलजा, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत आदि प्रमुख नेता शामिल हुए।
- कांग्रेस ने 4 नवंबर को राज्य के सभी जिलों में भूमि घोटालों और धामी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
- खरगे ने बीजेपी सरकार की ‘चरमराई कानून‑व्यवस्था’ और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए बदलाव की मांग की।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड कांग्रेस में वर्तमान में नेतृत्व के बीच मतभेद उभर रहे हैं, और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ ही इन मतभेदों का असर पार्टी की रणनीति और प्रदर्शन पर पड़ सकता है।




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