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UPSC के 100 साल: इतिहास, बदलाव और पहला भारतीय ICS‑सत्येंद्रनाथ टैगोर

4 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 01 Oct 2026• अपडेट 01 Oct 2026• 2 views
UPSC के 100 साल: इतिहास, बदलाव और पहला भारतीय ICS‑सत्येंद्रनाथ टैगोर
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 1926 से लेकर आज तक तीन‑स्टेज परीक्षा, ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटर‑आधारित टेस्ट सहित कई परिवर्तन देखे हैं। इस लेख में UPSC के इतिहास, 1922‑1928 में भारत…

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने इस साल अपना शताब्दी समारोह मनाया। 1 अक्टूबर 1926 को अंग्रेजी हुकूमत के तहत स्थापित पहला पब्लिक सर्विस कमीशन आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा चयन निकाय बन गया है। इस लेख में हम UPSC के 100 सालों के सफर, प्रमुख बदलाव और पहला भारतीय ICS‑सत्येंद्रनाथ टैगोर की कहानी को तथ्य‑आधारित रूप में प्रस्तुत करेंगे।

UPSC का जन्म और शुरुआती दौर

1 अक्टूबर 1926 को भारत में पहला पब्लिक सर्विस कमीशन स्थापित किया गया। इस कमीशन का मुख्य कार्य ब्रिटिश‑इंडिया में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र मंच प्रदान करना था। इसके पहले, प्रशासनिक चयन लंदन में आयोजित इंडियन सर्विस कमीशन (ICS) परीक्षा के माध्यम से होता था, जो 1955 से एक ओपन कॉम्पिटिशन रूप में चलती थी।

ICS परीक्षा का भारत में पहला आयोजन (1922‑1928)

ICS परीक्षा का पहला भारत‑आधारित सत्र 1922 में हुआ, जब इलाहाबाद में परीक्षा केंद्र स्थापित किया गया। 1928 में यह केंद्र दिल्ली में स्थानांतरित किया गया, जिससे भारतीय उम्मीदवारों को लंदन यात्रा की आवश्यकता नहीं रही। इस समय परीक्षा पूरी तरह से अंग्रेजी में होती थी और ग्रीक‑लैटिन जैसे क्लासिकल विषय भी शामिल थे, जिससे भारतीय अभ्यर्थियों के लिए इसे पास करना अत्यंत कठिन था।

पहला भारतीय ICS – सत्येंद्रनाथ टैगोर

1963 में सत्येंद्रनाथ टैगोर ने इस कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया और भारत के पहले भारतीय ICS अधिकारी बने। वह कोलकाता से इंग्लैंड जाकर परीक्षा दी थी और रविंद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे। उनके सफल होने के बाद 1977 में आयु सीमा में बदलाव किया गया, जिससे 23 वर्ष से 19 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई, जिससे युवा भारतीयों को तैयारी के लिए कम समय मिला।

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स्वतंत्रता के बाद UPSC का रूपांतरण

भारत को 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद, ब्रिटिश‑ICS प्रणाली को समाप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय विदेशी सेवा (IFS) की स्थापना की गई। पहली IAS परीक्षा दिसंबर 1947 में आयोजित हुई, जबकि 1948 में संयुक्त परीक्षा के माध्यम से IFS के पहले बैच का चयन किया गया। संविधान लागू होने के बाद फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के रूप में पुनर्स्थापित किया गया।

तीन‑स्टेज परीक्षा का परिचय (1979)

1976 में डीएस कोठारी समिति ने UPSC में तीन‑स्टेज परीक्षा (प्रिलिम्स, मेन्स, इंटरव्यू) का प्रस्ताव रखा, जिसे 1979 में लागू किया गया। इस बदलाव ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यापक बनाया। 1989 में ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) तकनीक का उपयोग शुरू हुआ, जिससे उत्तरपत्रों की ग्रेडिंग तेज़ और सटीक हुई।

डिजिटल परिवर्तन: ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटर‑आधारित टेस्ट

2000 में UPSC ने ऑनलाइन रिक्रूटमेंट एप्लीकेशन (ORA) सिस्टम लॉन्च किया, जिससे अभ्यर्थियों को इंटरनेट के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा मिली। 2010 तक अधिकांश परीक्षाओं के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन हो गया। 2013 में पहली बार कंप्यूटर‑आधारित भर्ती परीक्षा (CBT) आयोजित की गई, जिससे परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी उन्नति आई। उसी वर्ष मुख्य परीक्षा में चार सामान्य अध्ययन (General Studies) पेपर, एथिक्स‑इंटीग्रिटी‑एप्टीट्यूड (EIA) और वैकल्पिक विषय (Optional) को शामिल किया गया।

मुख्य बातें

  • 1 अक्टूबर 1926 को पब्लिक सर्विस कमीशन स्थापित, बाद में UPSC बना।
  • पहली बार भारत में ICS परीक्षा 1922 में इलाहाबाद में आयोजित, 1928 में दिल्ली में स्थानांतरित।
  • 1963 में सत्येंद्रनाथ टैगोर पहला भारतीय ICS अधिकारी बने।
  • स्वतंत्रता के बाद 1947‑48 में IAS और IFS की पहली परीक्षाएँ आयोजित।
  • 1979 में UPSC ने प्रिलिम्स‑मेंस‑इंटरव्यू (तीन‑स्टेज) प्रणाली लागू की।
  • 1989 में OMR तकनीक, 2000 में ऑनलाइन आवेदन, 2013 में कंप्यूटर‑आधारित टेस्ट।

भविष्य की दिशा

शताब्दी की उपलब्धियों के बाद भी UPSC निरंतर सुधार की प्रक्रिया में है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, परीक्षा पैटर्न में विविधता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें जारी हैं। यह उम्मीद की जाती है कि आने वाले दशकों में UPSस अधिक समावेशी, तकनीकी‑सक्षम और राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों के अनुरूप चयन प्रक्रिया अपनाएगा।

UPSC के 100 सालों की यात्रा न केवल भारत के प्रशासनिक ढाँचे की कहानी है, बल्कि देश के विकास, सामाजिक परिवर्तन और युवा शक्ति के सपनों का प्रतिबिंब भी है।

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