टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग साजिश: दिल्ली पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया
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टाइगर श्रॉफ पर 18 अक्टूबर को हुई फायरिंग की साजिश के पीछे की सच्चाई सामने आई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार आरोपियों—कुणाल, सुमित, राधा और बबिता—को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया और उन्हें मुंबई पुलिस को सौंप दिया। इस लेख में साजिश की क्रमबद्ध रूपरेखा, गिरफ्तारियों की प्रक्रिया और जांच के प्रमुख बिंदुओं को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया है।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की एनडीआर (न्यायिक डिप्लोमा रिसर्च) टीम ने मंगलवार को चारों आरोपियों को पकड़ कर कलंदरा के तहत बीएनएसएस की धारा 35(1)(b) के तहत अदालत में पेश किया। अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी, मुंबई को हिरासत में पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति दी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड की मांग की, जिसे भी न्यायालय ने मंजूरी दी। अब चारों आरोपी मुंबई पुलिस के हवाले कर दिए गए हैं।
साजिश की रूपरेखा
जांच के अनुसार, साजिश की शुरुआत कुणाल ने जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद की। वह अनिल पंडित से एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से संपर्क में रहा और पंडित के निर्देश पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस खरीदे। दो महीने पहले कुणाल ने राधा से मुलाकात की, उसे अपने कामों के बारे में बताया और रिश्ते बनाते हुए हथियार लेकर मुंबई जाने के लिए राजी किया।
15 अक्टूबर को कुणाल ने राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लाया। पिस्तौल राधा के बैग में छिपा था। सफर के दौरान कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए अनिल पंडित के निर्देश लगातार पहुंचाता रहा। 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएँ मुंबई के दादर स्टेशन पर उतरीं और एक होटल में ठहरीं। सुबह 11 बजे एक नाबालिग लड़के ने होटल के पास राधा से बैग ले लिया, जिसमें पिस्तौल था।
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18 अक्टूबर को शाम 7 बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई। अनिल पंडित ने कुणाल को बताया कि शूटर मुंबई में फंस गए हैं और उन्हें बाहर निकालने का इंतजाम करने को कहा। उसी दिन राधा और बबिता दादर-हरिद्वार एक्सप्रेस से मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हुईं। 20 अक्टूबर को राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से, और कुणाल व सुमित को सोनीपत से पकड़ा गया।
मुख्य बिंदु
- गिरफ्तारी: कुणाल, सुमित, राधा, बबिता को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- हथियारों की डिलीवरी: पिस्तौल राधा के बैग में छिपा था और मुंबई के दादर में शूटरों को सौंपा गया।
- संचार: सभी संपर्क एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से अनिल पंडित के निर्देशों के साथ रहे।
- कानूनी प्रक्रिया: बीएनएसएस की धारा 35(1)(b) के तहत कलंदरा, फिर मुंबई पुलिस को ट्रांजिट रिमांड के साथ सौंपा गया।
- फायरिंग की तिथि: 18 अक्टूबर, शाम 7 बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर।
जांच की आगे की दिशा
मुंबई पुलिस ने अब आरोपियों से विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि शूटरों को कौन से अन्य सहयोगी या नेटवर्क समर्थन प्रदान कर रहा था। साथ ही, एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से संचार की जाँच कर इस साजिश के पीछे के प्रमुख मस्तिष्क को उजागर करने की कोशिश की जा रही है।
टाइगर श्रॉफ के मामले में अब तक की सबसे बड़ी गिरफ़्तारी के बाद, पुलिस ने कहा है कि साजिश के सभी पहलुओं को पूरी तरह से उजागर करने के लिए आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।




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