सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में वकीलों पर मारपीट के मामले में यूपी सरकार को नोटिस भेजा
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गाजियाबाद में वकीलों के खिलाफ हुए हिंसक हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है। चार वकीलों की याचिका पर सुनवाई के दौरान, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सरकार से विस्तृत जवाब मांगा, जिसमें FIR में लगाए गए आरोपों की गंभीरता और बीएनएस सेक्शन के उचित प्रयोग की मांग की गई है।
घटना का विवरण
याचिकाकर्ता ए दीपा, ए देब कुमार, विपिन शर्मा और अनूप गोयल ने बताया कि 22 अक्टूबर को रात लगभग 9 बजे गाजियाबाद के इंदिरापुरम में उनके आवासीय परिसर में अज्ञात लोगों ने हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, अमित वर्मा और उनके बेटे राहुल वर्मा ने इन अज्ञात लोगों को परिसर में लाया, जिसके बाद चारों वकीलों और अन्य निवासियों के साथ मारपीट हुई।
FIR की प्रक्रिया
घटना के बाद पिटीशनर 1 ने इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई। मेडिकल जांच और सीसीटीवी फुटेज के वैरिफिकेशन के बाद FIR दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि FIR में केवल छोटे‑मोटे अपराधों के तहत ही आरोप लगाए गए, जबकि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 131, 191(2), 352 और 352(2) के तहत अधिक सख्त दंड की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और कमिश्नर ऑफ पुलिस को एक लेटर भी भेजा, जिसमें FIR में बीएनएस सेक्शन के अनुप्रयोग पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर, FIR में बीएनएस की धारा 74, 109, 117(3) को जोड़ने के निर्देश देने की मांग की।
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याचिकाकर्ताओं की मांग
- इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज FIR में बीएनएस की धारा 74 (महिला की शील भंग करने के इरादे से हमला), 109 (हत्या का प्रयास) और 117(3) (गंभीर चोट) को जोड़ना।
- FIR में लगाए गए छोटे‑मोटे अपराधों के बजाय अधिक सख्त दंड के तहत आरोप लगाना।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगे गए जवाब में विस्तृत तथ्यात्मक विवरण और कार्रवाई की योजना प्रस्तुत करना।
मुख्य बातें
- गाजियाबाद में 22 अक्टूबर को वकीलों पर मारपीट हुई।
- इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई, पर आरोपों की गंभीरता पर सवाल उठे।
- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर, बीएनएस सेक्शन के जोड़ने की मांग की।
- बार एसोसिएशन ने भी पुलिस को लेटर भेज कर FIR में सख्त दंड की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रणाली में पुलिस द्वारा दर्ज FIR की गुणवत्ता और दंड की सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगे के विकास के साथ इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कदमों की जानकारी मिलती रहेगी।




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