सुप्रीम कोर्ट ने महंगी दवाओं पर रोक के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का आदेश दिया
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सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों की मनमानी कीमतें और अनैतिक मार्केटिंग प्रथाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार को विशेषज्ञ समिति (कमेटी) गठित करने का आदेश दिया। यह कदम महंगी दवाओं के दुरुपयोग और डॉक्टरों को फ्रीबीज देकर विशेष दवाएँ लिखवाने की प्रथा को काबू में लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
केस की पृष्ठभूमि
यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) द्वारा दायर जनहित याचिका से उत्पन्न हुआ। याचिका में दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेश यात्राएँ, हॉस्पिटैलिटी आदि के माध्यम से दबाव डालकर महंगी ब्रांडेड दवाएँ लिखवाने की प्रथा को उजागर किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस प्रकार की प्रथा नागरिकों के ‘राइट टू हेल्थ’ का हनन करती है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया। इस समिति को दवा कंपनियों की मार्केटिंग प्रथाओं को विनियमित करने के लिए वैधानिक नियम बनाने की सिफारिशें देनी होंगी। कोर्ट ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया:
- डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेश यात्राएँ, हॉस्पिटैलिटी या अन्य आर्थिक लाभ देने वाली अनैतिक गतिविधियों को रोकना।
- दवाओं के खरीद मूल्य और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच के अत्यधिक अंतर को नियंत्रित करना।
- आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं के मुनाफे के मार्जिन को Drugs (Prices Control) Order, 2013 के तहत 16% पर सीमित करने की संभावना पर विचार करना।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को समिति गठन पर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
- अगली सुनवाई 29 जनवरी 2027 को निर्धारित है, जहाँ सरकार को समिति की प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी।
- कोर्ट ने उदाहरण दिया कि एक दवा रिटेलर को ₹2,700 में मिलती है, जबकि उसका MRP ₹27,000 तक पहुँच जाता है, यानी 10 गुना मुनाफा।
- केंद्रीय सरकार से पूछा गया कि क्यों आवश्यक दवाओं के मार्जिन को 16% पर कैप नहीं किया जा सकता।
समिति की कार्यप्रणाली
कमेटी को आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के सुझाव व आपत्तियों को सुनने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह रिपोर्ट दवा कंपनियों की मार्केटिंग प्रथाओं को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों का खाका तैयार करेगी।
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आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को ‘राइट टू हेल्थ’ के तहत गंभीर माना है और भविष्य में दवा कीमतों और मार्केटिंग प्रथाओं पर कड़ी निगरानी का संकेत दिया है। यदि समिति की सिफारिशें लागू होती हैं, तो डॉक्टरों को मिलने वाले आर्थिक प्रलोभनों पर प्रतिबंध और दवा कीमतों में पारदर्शिता लाने की उम्मीद है।




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