श्रद्धा दुबे ने लखनऊ पुलिस को फिर दिया गच्चा: सरेंडर की स्क्रिप्ट बिगड़ी, इंस्पेक्टर व डीसीपी पर गिरी गाज
3 मिनट में पढ़ें

लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे ने पुलिस की तैयार सरेंडर योजना को तोड़कर फिर से गच्चा खा दिया। सरेंडर की पूरी स्क्रिप्ट तैयार होने के बावजूद, वह मीडिया को बयान देकर पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गई, जिससे लखनऊ पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारी—इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर—पर सवाल उठे।
सरेंडर की योजना और उसका बिगड़ना
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रविवार को श्रद्धा दुबे के सरेंडर की स्क्रिप्ट तैयार की गई थी। योजना के अनुसार, वह पहले मीडिया को बयान देगी, फिर थाने में सरेंडर करेगी, और अंत में मामला हत्या के बजाय गैर‑इरादतन हत्या (हिंसात्मक हत्या) के रूप में दर्ज किया जाएगा, जिसमें श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि दोनों को आरोपी बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद, पुलिस का इरादा था कि श्रद्धा को गवाह बनाकर केस को सुसाइड के रूप में बदल दिया जाए।
हालांकि, श्रद्धा ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया। वह चाहती थी कि मामला सुसाइड के रूप में दर्ज हो और उसे गवाह बनाया जाए, साथ ही उसकी बहन रश्मि को पूरी तरह बाहर रखा जाए। इस कारण वह नियत समय से पहले ही मीडिया से बात कर ली और पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गई।
पुलिस की खोज और त्रुटियाँ
श्रद्धा दुबे को रायबरेली से लखनऊ तक और गोरखपुर से नेपाल तक तलाश किया जा रहा था। तीन दिन से वह लखनऊ में ही थी, लेकिन एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया को बुलाकर बयान दे दिया। सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब वह पहले ही भाग चुकी थी।
आपके लिए संबंधित खबरें
पुलिस ने नौ दिनों से फरार रहने वाली श्रद्धा के खिलाफ कोर्ट में सरेंडर की अर्जी भी दायर की थी, जिससे पुलिस को अपना इकबाल बचाने की जरूरत महसूस हुई। इस कारण स्क्रिप्ट तैयार की गई, लेकिन योजना के कार्यान्वयन में गंभीर चूक हुई।
इंस्पेक्टर और डीसीपी पर असर
लखनऊ के हजरतगंज थाने में पोस्टिंग वाले इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को शहर के सबसे प्रभावशाली और ताकतवर इंस्पेक्टरों में गिना जाता है। उनकी जिम्मेदारी थी कि श्रद्धा दुबे को जल्द से जल्द अरेस्ट कर मामले का खुलासा करें। नौ दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिला, और प्रेस कांफ्रेंस के बाद श्रद्धा ने फिर फरार हो गई। इस कारण इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया।
मामले की मॉनिटरिंग डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर कर रहे थे। इस विफलता के बाद उन्हें भी वेटिंग में डाला गया, जिससे पुलिस विभाग में आंतरिक जांच की संभावना बढ़ गई।
मुख्य बातें
- श्रद्धा दुबे ने लखनऊ में मीडिया को बयान देकर पुलिस के पहुंचते ही फरार हो गई।
- पुलिस ने सरेंडर की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी, जिसमें मामला हत्या के बजाय गैर‑इरादतन हत्या के रूप में दर्ज किया जाना था।
- श्रद्धा ने शर्तें स्वीकार नहीं कीं, इसलिए वह नियत समय से पहले ही मीडिया से बात कर ली।
- इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी विक्रम वीर को इस विफलता के कारण सजा या वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है।
- श्रद्धा को अभी भी रायबरेली, लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक तलाश किया जा रहा है।
आगे की संभावनाएँ
पुलिस को अब श्रद्धा दुबे को पकड़ने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाने पड़ेंगे। साथ ही, सरेंडर की स्क्रिप्ट में बदलाव और शर्तों पर विवाद के कारण केस की कानूनी दिशा में भी बदलाव आ सकता है। विभागीय जांच के बाद इंस्पेक्टर और डीसीपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।




टिप्पणियाँ
0