शिमला में बढ़ते भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, 77 करोड़ का आपदा प्रबंधन योजना फाइलों में फँसा
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हालिया मल्टी‑हैजार्ड क्लाइमेट रिस्क एंड वल्नरेबिलिटी असेसमेंट (CRVA) ने भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) को बढ़ते प्राकृतिक आपदा जोखिम के रूप में उजागर किया है। नगर निगम ने इन जोखिमों से निपटने के लिए 77 करोड़ रुपये की आपदा प्रबंधन योजना तैयार की, परन्तु बजट मंजूरी न मिलने के कारण यह योजना अभी भी फाइलों में बंद है।
जोखिम मूल्यांकन और प्रमुख निष्कर्ष
शिमला के लिए किए गए अध्ययन में पिछले दस वर्षों के आँकड़ों और विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण के आधार पर भविष्य में बादल फटना, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और अनियोजित निर्माण को प्रमुख चुनौतियों के रूप में बताया गया है। विशेष रूप से कृष्णा नगर सहित कई इलाकों को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है।
77 करोड़ रुपये का आपदा प्रबंधन मास्टर प्लान
नगर निगम ने इस वर्ष पहली बार 75 करोड़ रुपये का जलवायु बजट पेश किया, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के संभावित नुकसान का अध्ययन और नई आपदा प्रबंधन नीति का मसौदा शामिल है। इस बजट के तहत 77 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई, जिसका उद्देश्य नालों का सर्वे, जल निकासी व्यवस्था का सुधार और संवेदनशील वार्डों में चैनलाइजेशन कार्य करना था। हालांकि, इस योजना को केंद्र सरकार से बजट स्वीकृति तीन साल से नहीं मिली है और निगम का स्वयं का कोष भी खाली है।
मुख्य चुनौतियां
- बंद नालों और पुरानी जल निकासी प्रणाली के कारण बारिश के पानी का निकास बाधित होना।
- अंग्रेज़ों के समय निर्मित नालों का अनियोजित निर्माण के कारण क्षतिग्रस्त होना।
- बजट स्वीकृति में देरी के कारण तैयार योजना का कार्यान्वयन न हो पाना।
- संवेदनशील क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण से जोखिम बढ़ना।
नगर निगम की प्रतिक्रिया
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नालों का सर्वेक्षण चल रहा है और संवेदनशील वार्डों में नालों का चैनलाइजेशन किया जा रहा है। लेकिन बजट की कमी के कारण इन प्रयासों को धरातल पर उतारना कठिन हो रहा है।
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मुख्य बातें
- शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ा है।
- CRVA अध्ययन ने इन जोखिमों को प्रमुख आपदा के रूप में चिन्हित किया।
- 77 करोड़ रुपये की आपदा प्रबंधन योजना तीन साल से फाइलों में फँसी हुई है।
- नगर निगम ने जल निकासी सुधार के लिए नालों का सर्वेक्षण किया है।
- बजट स्वीकृति की कमी योजना के कार्यान्वयन में बाधा बन रही है।




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