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12 साल पुराने चेहरे के ट्यूमर से मिली राहत: शारदा हॉस्पिटल ने बिना निशान की दुर्लभ सर्जरी से 22 वर्षीय युवती को दी नई जिंदगी

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By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 30 Jun 2026• अपडेट 30 Jun 2026
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ग्रेटर नोएडा, 26 जून 2026: आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ सर्जिकल कौशल का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल…

ग्रेटर नोएडा, 26 जून 2026: आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ सर्जिकल कौशल का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल ने 22 वर्षीय युवती के चेहरे से 12 साल पुराने विशाल ट्यूमर को बिना किसी बाहरी निशान के सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह जटिल उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।

मरीज सुश्री प्रीति कुमारी पिछले लगभग 12 वर्षों से चेहरे पर लगातार बढ़ते हुए एक बड़े, लेकिन गैर-कैंसरयुक्त (बेनाइन) ट्यूमर से पीड़ित थीं। समय के साथ यह ट्यूमर आंख के सॉकेट, नाक और चेहरे के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित करने लगा था, जिससे चेहरे की संरचना और सामान्य कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो रही थीं।

दुर्लभ और स्कारलेस सर्जरी से हटाया गया ट्यूमर

विस्तृत चिकित्सीय और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद शारदा हॉस्पिटल के क्रेनियो मैक्सिलो फेशियल सर्जरी विभाग के निदेशक एवं यूनिट हेड डॉ. रोहित पुंगा ने एक जटिल लेकिन अत्याधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया “ट्रांसओरल ले फोर्ट एक्सेस ऑस्टियोटॉमी” के माध्यम से ट्यूमर निकालने की योजना बनाई।

सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने बाहरी चेहरे पर किसी भी प्रकार का चीरा लगाए बिना मुंह के अंदर से ही ट्यूमर तक पहुंच बनाई। इस प्रक्रिया में ऊपरी जबड़े की हड्डी को सावधानीपूर्वक स्थानांतरित कर ट्यूमर को पूरी तरह हटाया गया, जबकि आंख, नाक, गाल की हड्डी, ऊपरी जबड़े और दांतों जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखा गया।

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डॉ. रोहित पुंगा ने क्या कहा?

डॉ. रोहित पुंगा ने बताया कि यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि ट्यूमर कई वर्षों से धीरे-धीरे चेहरे की संरचना को प्रभावित कर रहा था।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल ट्यूमर निकालना नहीं था, बल्कि मरीज के चेहरे की बनावट, देखने की क्षमता और मुंह की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना भी था। ट्रांसओरल ले फोर्ट एक्सेस तकनीक की मदद से हम बिना किसी बाहरी निशान के पूरी सर्जरी करने में सफल रहे, जिससे मरीज की रिकवरी भी तेजी से हुई।”

आयुष्मान भारत योजना बनी सहारा

इस जटिल सर्जरी का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया, जिससे मरीज और उसके परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। यह मामला दर्शाता है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं किस प्रकार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली साबित हो सकती हैं।

शारदा हॉस्पिटल की विशेषज्ञता का उदाहरण

शारदा हॉस्पिटल और शारदाकेयर-हेल्थसिटी के ग्रुप सीईओ डॉ. कौसर शाह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना प्रत्येक मरीज को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा, “आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई यह सफल स्कारलेस क्रेनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी इस बात का उदाहरण है कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं मिलकर मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।”

मरीज की जिंदगी में लौटी मुस्कान

सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। चेहरे की संरचना, कार्यक्षमता और सौंदर्यात्मक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए डॉक्टरों ने न केवल एक जटिल बीमारी का सफल उपचार किया, बल्कि मरीज के आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी वापस लौटाया है।

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