सुल्तानपुर की अदालत ने अमित शाह के मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी किया
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सुल्तानपुर की विशेष एमपी‑एमएलए अदालत ने अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बरी कर दिया। यह फैसला छह साल पुराने मुकदमे में आया, जिसमें लगभग 140 पेशियां हुई थीं।
मुकदमे की पृष्ठभूमि
मामला 8 मई 2018 को शुरू हुआ था, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी से नाराज हुए भाजपा नेता और तत्कालीन जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई और प्रक्रिया
अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब किया था। 20 फरवरी 2024 को उन्हें जमानत मिली और तब से कई बार अदालत में पेश हुए। कुल चार बार सुल्तानपुर में उपस्थित होकर उन्होंने अपने बचाव को आगे बढ़ाया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने की मांग की, जिसे विभिन्न अदालतों ने खारिज कर दिया।
निर्णय के मुख्य कारण
- अदालत ने 49 पेज के आदेश में शिकायतकर्ता विजय मिश्रा को पीड़ित व्यक्ति की श्रेणी में नहीं माना।
- गवाहों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास पाया गया, जिससे शिकायत की विश्वसनीयता कम हुई।
- राहुल गांधी के बयान का शिकायतकर्ता पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा, यह भी अदालत ने माना।
निर्णय का प्रभाव
निर्णय के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल, पटाखे और नारेबाजी करके खुशी जताई। वहीं, विजय मिश्रा ने कोर्ट के फैसले की कॉपी नहीं देखी है और आगे अपील दायर करने की संभावना जताई है।
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मुख्य बातें
- मामला 2018 का है, लेकिन 2024 में अंतिम सुनवाई पूरी हुई।
- कुल 140 पेशियां और चार बार सुल्तानपुर में उपस्थित होना पड़ा।
- अदालत ने शिकायतकर्ता को पीड़ित नहीं माना और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया।
- राहुल गांधी को बरी किया गया, जबकि शिकायतकर्ता अपील कर सकता है।




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