राहत मित्र: भारत‑म्यांमार की सेनाओं ने पहला संयुक्त आपदा राहत अभ्यास शुरू किया
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भारत और म्यांमार की थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने पहली बार संयुक्त रूप से मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास ‘राहत मित्र’ (RAHAT MITRA) शुरू किया। यह दो दिवसीय अभ्यास 5 नवंबर को तमिलनाडु के चेन्नई में शुरू हुआ, जिसमें दोनों देशों के 300 से अधिक सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।
अभ्यास का उद्देश्य और थीम
‘राहत मित्र’ का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा – बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य बड़े संकट – के समय दोनों देशों की सेनाओं के बीच तेज़ और समन्वित बचाव‑राहत कार्य सुनिश्चित करना है। अभ्यास के दौरान सैनिक आपदा राहत से जुड़े अपने‑अपने अनुभव साझा करेंगे और तीनों सेवाओं (थलसेना, नौसेना, वायुसेना) के बीच तालमेल कैसे बेहतर बनाया जाए, इस पर चर्चा करेंगे।
अभ्यास की थीम है “Together for Humanity, Stronger through Partnership” – अर्थात् मानवता के लिए एकजुटता और साझेदारी से शक्ति। यह थीम दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और आपदा के समय सहयोग क्षमता को विकसित करने की दिशा में है।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति से जुड़ाव
यह अभ्यास भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें पड़ोसी देशों को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही यह भारत के MAHASAGAR विजन के साथ भी संरेखित है, जिसका लक्ष्य क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास और सहयोग को सुदृढ़ करना है। इस प्रकार ‘राहत मित्र’ न केवल सैन्य सहयोग को बढ़ाता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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मुख्य बातें
- अभ्यास का नाम: ‘राहत मित्र’ (RAHAT MITRA)
- स्थान: चेन्नई, तमिलनाडु
- शुरू तिथि: 5 नवंबर (दो दिवसीय)
- भागीदारी: भारत और म्यांमार की थलसेना, नौसेना, वायुसेना के कुल 300+ सैन्यकर्मी
- जिम्मेदारी: भारतीय नौसेना ने अभ्यास की समग्र देखरेख संभाली
- थीम: “Together for Humanity, Stronger through Partnership”
- उद्देश्य: आपदा‑समय में तेज़, समन्वित बचाव‑राहत संचालन सुनिश्चित करना
- नीति संबंध: भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और MAHASAGAR विजन के साथ संरेखित
भविष्य की संभावनाएँ
लंबे समय से भारत‑म्यांमार के रक्षा संबंध मजबूत रहे हैं, पर यह पहला त्रि‑सेवा अभ्यास दोनों देशों के सैन्य सहयोग को नई दिशा देता है। अभ्यास के सफल समापन के बाद दोनों पक्ष भविष्य में अधिक जटिल आपदा‑राहत परिदृश्यों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण, उपकरण‑साझा करने और सामरिक योजना बनाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
‘राहत मित्र’ के माध्यम से दोनों देशों ने यह संदेश दिया है कि प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट के समय उनकी सेनाएँ एक‑दूसरे के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह सहयोग न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि मानवीय सहायता के क्षेत्र में भी एक मॉडल स्थापित करेगा।




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