पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तरनतारन‑अमृतसर सबसे आगे, 10 लाख रुपये का जुर्माना
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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में फिर से बढ़ोतरी देखी गई है। 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच कुल 542 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें लगभग आधी तरनतारन जिले में हुईं। इस बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कड़ी कार्रवाई का इशारा किया है।
पराली जलाने की घटनाओं का विस्तृत आँकड़ा
राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल पंजाब में धान की कुल खेती 34.506 लाख हेक्टेयर है, जिसमें 23 अक्टूबर तक 34.82 प्रतिशत फसल की कटाई हो चुकी है। तरनतारन में 73 प्रतिशत कटाई के बाद 257 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि अमृतसर में 83 प्रतिशत कटाई के साथ 142 घटनाएं दर्ज हुईं। बाकी जिलों में शेष 143 घटनाएं हुईं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
पराली जलाने के 206 मामलों में अब तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में कुल 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 5.45 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेशों की अवज्ञा) के तहत कुल 91 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 45 तरनतारन और 13 अमृतसर में दर्ज हैं।
CAQM का रुख
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इस मुद्दे को लेकर उच्चस्तरीय टीम बनाकर अमृतसर और तरनतारन के जिलाधिकारियों व संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पराली जलाने पर रोक लगाने, जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने और किसानों तक समय पर मशीनरी व अन्य सुविधाएं पहुंचाने के निर्देश दिए।
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मुख्य बातें
- 15 सितंबर‑23 अक्टूबर के बीच पंजाब में 542 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज।
- लगभग आधी घटनाएं तरनतारन (257) और अमृतसर (142) में हुईं।
- धान की कुल खेती 34.506 लाख हेक्टेयर, 34.82 % कटाई पूरी।
- पराली जलाने के 206 मामलों में 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माना, 5.45 लाख रुपये वसूल।
- भारतीय दंड संहिता धारा 223 के तहत 91 FIR दर्ज, 45 तरनतारन, 13 अमृतसर।
- CAQM ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने और मशीनरी उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए।
पराली जलाने को रोकने के लिए सरकार की नीतियों और स्थानीय प्रशासन की कड़ी कार्रवाई दोनों ही आवश्यक हैं, ताकि वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और किसानों को वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराए जा सकें।




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