प्रयागराज में जवाहर पंडित हत्याकांड: करवरिया बंधुओं की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज
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प्रयागराज (पूर्व इलाहाबाद) में 13 अगस्त 1996 को सपा विधायक जवाहर पंडित की हत्या के मामले में करवरिया बंधुओं को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर दूसरी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया, जिससे वे अब भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करने के कारण यह बताया कि अभियुक्तों के खिलाफ पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है और उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक अपीलों में भी कोई नई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुए हैं। जमानत अर्जी में रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू, पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व एमएलसी सूर्यभान करवरिया और पूर्व विधायक उदयभान करवरिया ने भाग लिया था।
पिछला न्यायिक इतिहास
मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में हुई, जहाँ 2019 में करवरिया बंधुओं सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की, जिसमें जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की डिविजन बेंच ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
हत्याकांड की घटनाक्रम
हत्याकांड के दिन, प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में शांति थी। अचानक सपा के तत्कालीन विधायक जवाहर पंडित गाड़ी से उतरते ही उनके ऊपर AK‑47 से दिनदहाड़े और अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। इस गोलीबारी में उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। हमलावर भी AK‑47 लहराते हुए मौके से फरार हो गए।
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मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करवरिया बंधुओं की दूसरी जमानत अर्जी खारिज की।
- रामचंद्र त्रिपाठी, कपिल मुनि करवरिया, सूर्यभान करवरिया और उदयभान करवरिया उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
- हत्याकांड 13 अगस्त 1996 को प्रयागराज के सिविल लाइंस में हुआ।
- जवाहर पंडित पर AK‑47 से गोलीबारी कर हत्या की गई।
- 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट के इस निर्णय से करवरिया बंधुओं को जेल में रहने का समय और भी लंबा हो गया है, जबकि न्यायिक प्रक्रिया अभी भी चल रही है। यह मामला उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हिंसा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।




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