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नेताजी की अस्थियाँ भारत लाने की मांग तेज: परपोते चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र

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By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 25 Dec 2025• अपडेट 25 Dec 2025
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स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा एक ऐतिहासिक मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। नेताजी के…

स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा एक ऐतिहासिक मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी गई नेताजी की अस्थियों को भारत वापस लाने की औपचारिक मांग की है।

पत्र में चंद्र कुमार बोस ने कहा है कि नेताजी केवल इतिहास की किताबों का विषय नहीं हैं, बल्कि वे भारत की आत्मा, आत्मसम्मान और आज़ादी की चेतना के प्रतीक हैं। ऐसे में उनकी अस्थियों का भारत की धरती पर सम्मानपूर्वक पुनःस्थापन देश की भावनाओं से सीधे जुड़ा विषय है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्ष 2025 में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना के 80 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और इसी दौरान दिल्ली में Indian National Army (INA) स्मारक स्थापित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे ऐतिहासिक समय में नेताजी की अस्थियों को भारत लाना उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि नेताजी की अस्थियों को भारत लाने की मांग इससे पहले भी कई बार उठ चुकी है। INA के पूर्व सैनिक, नेताजी की पुत्री प्रोफेसर अनीता बोस-फाफ, और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी समय-समय पर भारत सरकार से इस विषय पर पहल करने की अपील की है।

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चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे इस विषय पर सकारात्मक और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां नेताजी की विरासत को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उसे महसूस भी कर सकें।

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