नेपाल में बैन हुई भारतीय फिल्मों की पूरी सूची: ‘उड़ता तीर’ से पहले कौन-कौन सी फ़िल्में रोक गईं?
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नेपाल में भारतीय फ़िल्मों पर प्रतिबंध का मुद्दा बार‑बार सामने आता रहा है। हाल ही में आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की आगामी फ़िल्म ‘उड़ता तीर’ को नेपाल के सेंसर बोर्ड ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी है। यह पहली बार नहीं है; नेपाल में पहले भी कई भारतीय फ़िल्मों को विभिन्न कारणों से बैन किया गया है। नीचे उन फ़िल्मों की सूची और बैन के कारणों का विवरण दिया गया है।
मुख्य बातें
- ‘उड़ता तीर’ को नेपाल में सेंसर बोर्ड ने संवेदनशील विषयवस्तु के कारण बैन किया।
- पहले भी ‘आदिपुरुष’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’, ‘दिल्ली बेली’ और ‘कर्मा’ जैसी फ़िल्में बैन रही हैं।
- बैन के मुख्य कारण धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संवेदनाएँ हैं।
- कई बार बैन के बाद अदालत के आदेश से प्रतिबंध हटाया गया, पर विरोध जारी रहने पर फ़िल्में फिर भी नहीं चल पाईं।
नेपाल में बैन हुई फ़िल्मों की सूची
1. उड़ता तीर (2026)
आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की स्पाई कॉमेडी ‘उड़ता तीर’ को नेपाल के मिनिस्ट्री ऑफ कम्यूनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी। सेंसर बोर्ड ने कहा कि फ़िल्म देश के सिनेमा कानून के एक प्रावधान का उल्लंघन करती है। यह फ़िल्म 23 अक्टूबर 2026 को भारत में रिलीज़ होने वाली है।
2. आदिपुरुष (2023)
फ़िल्म में एक संवाद में माता सीता को ‘भारत की बेटी’ कहा गया, जिससे नेपाली मान्यताओं के विपरीत विवाद उत्पन्न हुआ। काठमांडू और पोखरा महानगरपालिकाओं ने इस संवाद को हटाने तक सभी हिंदी फ़िल्मों पर अस्थायी रोक लगा दी थी। बाद में अदालत ने रोक हटाई, पर विरोध के कारण फ़िल्म नेपाल में नहीं चल पाई।
3. चांदनी चौक टू चाइना (2022)
अक्षय कुमार की इस फ़िल्म की शुरुआत में भगवान बुद्ध के जन्मस्थान को भारत बताया गया, जबकि ऐतिहासिक रूप से उनका जन्म लुंबिनी (नेपाल) में हुआ है। इस तथ्य को लेकर भारी विरोध हुआ और नेपाल सरकार ने फ़िल्म पर बैन लगा दिया।
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4. दिल्ली बेली (2011)
फ़िल्म में अभद्र भाषा, अश्लीलता और बोल्ड कंटेंट के कारण नेपाल के सेंसर बोर्ड ने स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी। काठमांडू के कुछ सिनेमाघरों ने बिना कटौती के फ़िल्म दिखाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने थिएटरों पर छापेमारी कर प्रिंट जब्त कर लिए।
5. कर्मा (2018)
‘कर्मा’ में एक काल्पनिक नक्शा दिखाया गया था, जिसमें नेपाल के कुछ हिस्सों को भारत का हिस्सा बताया गया। यह नक्शा राष्ट्रीय भावना को ठेस पहुंचाने वाला माना गया और फ़िल्म को बैन किया गया।
बैन के पीछे के प्रमुख कारण
नेपाल में फ़िल्म बैन के मुख्य कारण अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाएँ, राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी गलत जानकारी, और अभद्र सामग्री होते हैं। सेंसर बोर्ड इन पहलुओं की जाँच करता है और यदि फ़िल्म में ऐसी कोई बात पाई जाती है जो राष्ट्रीय भावना या सामाजिक शांति को प्रभावित कर सकती है, तो वह प्रतिबंध लगा देता है।
भविष्य में क्या उम्मीद की जा सकती है?
भारतीय फ़िल्म निर्माताओं को नेपाल में रिलीज़ की योजना बनाते समय स्थानीय संवेदनाओं को ध्यान में रखना होगा। यदि फ़िल्म में ऐसी कोई सामग्री है जो नेपाल की सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध हो, तो पहले से ही संशोधन या स्थानीय सेंसर बोर्ड की मंजूरी लेना आवश्यक हो सकता है।
इस प्रकार, ‘उड़ता तीर’ सहित कई फ़िल्मों का बैन नेपाल में फ़िल्म उद्योग के लिए एक सतत चुनौती बना हुआ है।




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