नेवी ने गोवा में राफेल M का ट्रायल शुरू किया, INS विक्रांत के साथ संगतता की जाँच
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भारतीय नौसेना ने गोवा के आईएनएस हंसा स्थित शोर बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी (SBTF) में राफेल मरीन (राफेल M) फाइटर जेट का ट्रायल शुरू कर दिया है। यह परीक्षण भारत के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर इस फ्रेंच विमान को सफलतापूर्वक लॉन्च और लैंड करने के लिए आवश्यक बदलावों की पुष्टि करेगा।
ट्रायल का उद्देश्य और महत्व
राफेल M को मूल रूप से कैटापुल्ट‑असिस्टेड टेक‑ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी (CATOBAR) प्रणाली वाले विमान वाहक के लिए डिजाइन किया गया है। भारत का वर्तमान प्रमुख विमान वाहक INS विक्रांत शॉर्ट टेक‑ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी (STOBAR) प्रणाली का उपयोग करता है, जिसमें स्की‑जंप रैंप से टेक‑ऑफ और अरेस्टर वायर से लैंडिंग होती है। इस अंतर को पाटने के लिए राफेल M को STOBAR कॉन्फ़िगरेशन के साथ संगत बनाना आवश्यक है।
ट्रायल के दौरान स्की‑जंप लॉन्च कॉन्फ़िगरेशन, रिकवरी सिस्टम, अरेस्टर हुक और अन्य ऑन‑बोर्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर का वैलिडेशन किया जाएगा, जिससे यह तय हो सकेगा कि राफेल M भारत के स्वदेशी कैरियर पर ऑपरेट करने के लिए उपयुक्त है या नहीं।
राफेल M की तकनीकी विशेषताएँ
राफेल मरीन एक दो‑इंजन, मल्टी‑रोल फाइटर जेट है, जिसे फ्रेंच डसॉल्ट एविएशन ने फ्रेंच नेवी के लिए विकसित किया है। प्रमुख विशेषताएँ:
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- टेक‑ऑफ वजन: अधिकतम 24.5 टन
- इंजन: दो सैफरन M88‑E4 टर्बोफैन
- अधिकतम गति: Mach 1.8 (लगभग 2,200 km/h)
- नेवल‑स्पेसिफिक लैंडिंग कॉन्फ़िगरेशन और अरेस्टर हुक
- एवियोनिक्स: RBE2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार, जो कई हवाई और नेवल टारगेट को पहचान और ट्रैक कर सकता है
- मिशन प्रोफ़ाइल: एयर डिफेंस, एयर सुपीरियोरिटी, डीप स्ट्राइक्स, रेकी और एंटी‑शिप ऑपरेशन्स
डील की रूपरेखा और डिलीवरी शेड्यूल
अप्रैल 2025 में भारत और फ्रांस के बीच 26 राफेल M विमानों (22 सिंगल‑सीट और 4 ट्रेनर) की खरीद के लिए समझौता हुआ था। इस डील की कीमत लगभग 63,000‑64,000 करोड़ रुपये बताई गई है। विमानों की डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक अपेक्षित है। इन विमानों को मुख्यतः INS विक्रांत पर तैनात किया जाएगा और मौजूदा मिग‑29K के स्थान पर उपयोग किया जाएगा। नौसेना का लक्ष्य है कि राफेल M को दोनों भारतीय विमान वाहक – INS विक्रांत और भविष्य के INS विक्रमादित्य – पर ऑपरेट किया जा सके।
मुख्य बातें
- ट्रायल गोवा के SBTF में चल रहा है, जिसका उद्देश्य राफेल M को STOBAR प्रणाली के साथ संगत बनाना है।
- राफेल M मूल रूप से CATOBAR विमान वाहक के लिए डिजाइन किया गया है; इसलिए स्की‑जंप लॉन्च और अरेस्टर वायर लैंडिंग की वैधता आवश्यक है।
- डील में 26 विमानों की खरीद शामिल है, जिसकी कीमत लगभग 63‑64 हजार करोड़ रुपये है, डिलीवरी 2028‑2029 में अपेक्षित।
- विमान का अधिकतम टेक‑ऑफ वजन 24.5 टन, दो M88‑E4 इंजन, Mach 1.8 की गति और AESA रडार जैसी उन्नत विशेषताएँ हैं।
- राफेल M को INS विक्रांत पर तैनात करके मिग‑29K की जगह ली जाएगी और भविष्य में INS विक्रमादित्य पर भी उपयोग किया जाएगा।
आगे की संभावनाएँ
यदि ट्रायल सफल रहता है, तो राफेल M भारत की समुद्री शक्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगा। यह न केवल एयर‑डॉमिनेंस को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समुद्री सतह पर एंटी‑शिप और स्ट्राइक क्षमताओं को भी बढ़ाएगा। साथ ही, इस परीक्षण से भारतीय नौसेना को अपने स्वदेशी विमान वाहकों के साथ विदेशी फाइटर जेट्स के एकीकरण में मूल्यवान तकनीकी अनुभव मिलेगा।




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