LPU कैंपस में रेप की अफवाह को SIT ने खारिज किया, SIT ने कोई सबूत नहीं पाया
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के कैंपस में 26 सितंबर को दुष्कर्म की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली, जिससे छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया। लेकिन पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने विस्तृत जांच के बाद इस अफवाह को झूठी साबित कर दिया और हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया।
जांच की पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में पुलिस ने बताया कि 26 सितंबर को LPU कैंपस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन एक बेबुनियाद अफवाह के कारण हुआ था। इस अफवाह के अनुसार कैंपस के गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी, परंतु इस दावे की कोई पुष्टि नहीं थी।
SIT ने इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं, सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों सहित 50 से अधिक लोगों के विस्तृत बयान दर्ज किए। साथ ही, घटना के दिन और उससे पहले के कई दिनों के डिजिटल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक डेटा की बारीकी से जांच की गई।
डिजिटल और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष
- सीसीटीवी फुटेज में किसी भी प्रकार की हिंसा या यौन उत्पीड़न का कोई संकेत नहीं मिला।
- डिजिटल लॉग और मोबाइल डेटा में दुष्कर्म से संबंधित कोई संदेश या कॉल नहीं पाया गया।
- साक्षी और सुरक्षा कर्मियों के बयान में घटना की कोई पुष्टि नहीं हुई।
- फॉरेंसिक रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के शारीरिक या जैविक सबूत की अनुपस्थिति दर्ज की गई।
इन सभी तथ्यों के आधार पर SIT ने निष्कर्ष निकाला कि कैंपस या हॉस्टल के भीतर दुष्कर्म की कोई भी घटना नहीं हुई थी।
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हाईकोर्ट में हलफनामा और क्लोजर रिपोर्ट
पंजाब पुलिस ने हाईकोर्ट को एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि पूरी घटना महज एक झूठी अफवाह थी। पुलिस ने यह भी कहा कि अफवाह के कारण छात्रों ने कैंपस में उपद्रव किया, लेकिन यह उपद्रव भी अफवाह के प्रसार के बाद ही हुआ।
अब पुलिस संबंधित निचली अदालत में आधिकारिक क्लोजर रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है, जिससे यह मामला कानूनी तौर पर बंद हो जाएगा। साथ ही, अफवाह फैलाने और फर्जी खबरें प्रसारित करने वाले तत्वों की पहचान कर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मुख्य बातें
- 26 सितंबर को LPU कैंपस में दुष्कर्म की अफवाह सोशल मीडिया पर फैली।
- पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने 50 से अधिक लोगों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
- डिजिटल और फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला।
- पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अफवाह को झूठा साबित किया।
- क्लोजर रिपोर्ट जल्द ही अदालत में पेश की जाएगी, और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना यह दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के फैलाए गए अफवाहें बड़े पैमाने पर सामाजिक अशांति का कारण बन सकती हैं। अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया है कि भविष्य में ऐसी अफवाहों की जाँच के लिए डिजिटल साक्ष्य और साक्षी बयानों पर निर्भर रहना आवश्यक है।




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