लैब में बना सोना: न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन से शुद्धता तक का पूरा प्रॉसेस
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सैन फ्रांसिस्को स्थित मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि उन्होंने न्यूक्लियर फ्यूजन‑आधारित ट्रांसम्यूटेशन प्रक्रिया से पारे (मरकरी) को शुद्ध सोने में बदल दिया है। यह तकनीक वैज्ञानिक रूप से जटिल है और अभी तक व्यावसायिक स्तर पर नहीं पहुंची है, परन्तु इसने सोने के उत्पादन के भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
लैब में सोना बनाने की तकनीक
मैराथन फ्यूजन ने बताया कि उन्होंने न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन नामक प्रक्रिया अपनाई। इस प्रक्रिया में पारे‑198 के नाभिक को उच्च‑ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन के साथ टकराया जाता है, जिससे पारे‑197 बनता है। पारे‑197 एक रेडियोएक्टिव आइसोटोप है जो समय के साथ क्षय होकर स्थिर गोल्ड‑197 (Au‑197) में बदल जाता है। यह वही स्थिर आइसोटोप है जो प्राकृतिक सोने में मौजूद होता है।
प्रक्रिया के मुख्य चरण
- पारे‑198 को फ्यूजन रिएक्टर में उच्च‑ऊर्जा न्यूट्रॉन के संपर्क में लाना।
- न्यूट्रॉन के टकराव से पारे‑197 का निर्माण।
- पारे‑197 का प्राकृतिक क्षय होकर Au‑197 में परिवर्तित होना।
- उत्पन्न सोने को रासायनिक रूप से अलग कर शुद्धता की जाँच करना।
शुद्धता और रेडियोएक्टिव मिलावट
भौतिक रूप से Au‑197 वही तत्व है जो खदान से निकाला गया सोना होता है, इसलिए यदि प्रक्रिया केवल Au‑197 उत्पन्न करती है तो रासायनिक रूप से वह शुद्ध सोना माना जा सकता है। परन्तु अधिकांश प्रयोगों में अतिरिक्त रेडियोएक्टिव आइसोटोप भी बनते हैं। उदाहरण के तौर पर, यूरोप के CERN प्रयोग में Au‑190 से Au‑199 तक के कई आइसोटोप उत्पन्न हुए, जिनमें से केवल Au‑197 ही स्थिर है।
ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के अनुसार, रिएक्टर‑आधारित सोना अक्सर अन्य रेडियोआइसोटोप से दूषित रहता है, जिससे वह ज्वैलरी या निवेश‑उपयोग के लिये उपयुक्त नहीं माना जाता। रेडियोएक्टिव मिलावट को शारीरिक रूप से अलग करना कठिन है, इसलिए शुद्धता की पुष्टि में अतिरिक्त जटिलता आती है।
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बाजार पर संभावित प्रभाव
वर्तमान में लैब‑निर्मित सोने की उत्पादन लागत बहुत अधिक है, और उत्पादन मात्रा भी सीमित है। यदि भविष्य में लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है, तो यह सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। परन्तु अभी तक यह कहना जल्दबाजी है, क्योंकि शुद्धता, सुरक्षा और नियामक मंजूरी जैसे कई पहलुओं को पहले सुलझाना आवश्यक है।
मुख्य बातें
- मैराथन फ्यूजन ने पारे‑198 को न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन से Au‑197 में बदलने का दावा किया है।
- प्रक्रिया में उच्च‑ऊर्जा न्यूट्रॉन का उपयोग करके पारे‑197 बनता है, जो समय के साथ स्थिर सोना बनता है।
- उत्पन्न सोना रासायनिक रूप से खदान के सोने जैसा हो सकता है, परन्तु अक्सर अन्य रेडियोआइसोटोप की मिलावट रहती है।
- वर्तमान में उत्पादन लागत और मात्रा सीमित है, इसलिए बाजार पर तत्काल प्रभाव की संभावना कम है।
- भविष्य में लागत‑कमी और बड़े‑पैमाने पर उत्पादन संभव हो तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
इस प्रकार, लैब में सोना बनाना वैज्ञानिक दृष्टि से संभव है, परन्तु व्यावसायिक उपयोग और शुद्धता के मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। आगे के शोध और नियामक मानकों की स्पष्टता के बाद ही इस तकनीक का वास्तविक आर्थिक प्रभाव समझा जा सकेगा।




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