कर्नाटक में किडनी फेलियर और यूरिन संबंधी बीमारियों से हुई मौतों में पिछले एक दशक में तेज़ वृद्धि देखी गई है। मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में 5,940 मौतें थीं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 18,730 तक पहुँच गया, यानी लगभग तीन गुना बढ़ा।
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आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कर्नाटक में कुल 1.6 लाख मौतें चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित हुईं, जबकि 2016 में यह संख्या 1.4 लाख से अधिक थी। कुल मौतों में 8% की वृद्धि हुई, पर किडनी व यूरिन रोगों से हुई मौतों में 11.8% की हिस्सेदारी रही, जो रक्त संचार और श्वसन रोगों के बाद तीसरा प्रमुख कारण है।
वर्ष दर वर्ष वृद्धि
- 2019: 7,402 मौतें
- 2021: 9,884 मौतें
- 2022: 13,569 मौतें
- 2024: 17,689 मौतें
2018 में मामूली गिरावट के बाद 2012 के बाद लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्य जोखिम कारक
- डायबिटीज: नियंत्रित न होने पर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है; लगभग 40% डायबिटीज रोगियों में किडनी जटिलताओं का जोखिम है।
- हाई ब्लड प्रेशर: रक्तचाप नियंत्रण में कठिनाई किडनी कार्यक्षमता को घटा देती है और हृदय रोगों को बढ़ावा देती है।
- मोटापा और बदलती जीवनशैली: इन कारकों की बढ़ती प्रवृत्ति किडनी रोगों में इजाफा कर रही है।
- प्रोटीन सप्लीमेंट: बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन से हानिकारक तत्व किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उम्र के अनुसार मृत्यु दर
रिपोर्ट में बताया गया है कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की किडनी फेलियर से हुई मौतों में 87.8% हिस्सेदारी है। विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 5,648 मौतें दर्ज हुईं, जो कुल मौतों का 37.7% है।
विशेषज्ञों की राय
यशवंतपुर स्थित मणिपाल अस्पताल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. दीपक चित्रल्ली ने कहा कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और अनियंत्रित प्रोटीन सप्लीमेंट सेवन मिलकर किडनी रोगों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने किडनी की कार्यक्षमता और हृदय रोगों के बीच परस्पर संबंध पर भी प्रकाश डाला।
निवारण के उपाय
विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्त शर्करा और रक्तचाप का नियंत्रण, संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट न लेने की सलाह दी है।
कर्नाटक सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए जागरूकता अभियानों और निवारक उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
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