Skip to content
Tuesday, 13 October 2026|India
13 Octआज की खबरें
ऐप डाउनलोड
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 अक्टूबर को पूरे भारत में SIR विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया•शिमला में बढ़ते भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, 77 करोड़ का आपदा प्रबंधन योजना फाइलों में फँसा•छह राज्यों में नए राज्यपाल, कर्नाटक में आरक्षण पर बड़ा फैसला, राहुल गांधी की याचिका में खामियां•छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में नौ आरोपी गिरफ्तार, ईडी ने 860 करोड़ का दावा किया•एलओसी पर घुसपैठ की कोशिश में लैंडमाइन विस्फोट से चार लश्कर-ए-तैयबा कमांडर मारे•शिवा की रहस्यमय मौत: लिव‑इन फ्लैट से गिरते ही मिली बर्बरता के निशान•होर्मुज में दो टैंकरों पर हमले से भारत ने जताई कड़ी निंदा, लापता भारतीय नाविकों की खोज जारी•दिल्ली‑NCR में अचानक बदलते मौसम ने लाया तेज़ बारिश और ठंडसंयुक्त किसान मोर्चा ने 23 अक्टूबर को पूरे भारत में SIR विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया•शिमला में बढ़ते भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, 77 करोड़ का आपदा प्रबंधन योजना फाइलों में फँसा•छह राज्यों में नए राज्यपाल, कर्नाटक में आरक्षण पर बड़ा फैसला, राहुल गांधी की याचिका में खामियां•छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में नौ आरोपी गिरफ्तार, ईडी ने 860 करोड़ का दावा किया•एलओसी पर घुसपैठ की कोशिश में लैंडमाइन विस्फोट से चार लश्कर-ए-तैयबा कमांडर मारे•शिवा की रहस्यमय मौत: लिव‑इन फ्लैट से गिरते ही मिली बर्बरता के निशान•होर्मुज में दो टैंकरों पर हमले से भारत ने जताई कड़ी निंदा, लापता भारतीय नाविकों की खोज जारी•दिल्ली‑NCR में अचानक बदलते मौसम ने लाया तेज़ बारिश और ठंड
विज्ञापन
Home » कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी‑एसटी आरक्षण बढ़ाने को असांविधानिक करार दिया
Government Policy

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी‑एसटी आरक्षण बढ़ाने को असांविधानिक करार दिया

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 13 Oct 2026• अपडेट 13 Oct 2026
GB News India ऐप डाउनलोड करेंGoogle Play Store पर उपलब्ध
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी‑एसटी आरक्षण बढ़ाने को असांविधानिक करार दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2022 के आरक्षण कानून को रद्द कर दिया, जिसमें एससी‑एसटी का कोटा 50% से ऊपर बढ़ाया गया था, इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के विरुद्ध बताया…

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें 2022 में पारित राज्य आरक्षण अधिनियम को असांविधानिक घोषित किया गया। इस कानून ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण को 50% की संवैधानिक सीमा से ऊपर बढ़ाया था।

फैसले की मुख्य बातें

  • कर्नाटक हाईकोर्ट की पीठ, मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायाधीश के एस हेमलेखा ने अधिनियम की धारा 3 को असांविधानिक कहा।
  • धारा 3 संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह आरक्षण को 50% से अधिक कर देती है।
  • धारा 4, जो राज्य सेवाओं में एससी‑एसटी के लिए बढ़े हुए आरक्षण का प्रावधान करती थी, को भी अनुच्छेद 14 और 16 के विरुद्ध पाया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में 50% की आरक्षण सीमा स्थापित की थी, जिसे अब तक कई फैसलों में बरकरार रखा गया है।

कानून की पृष्ठभूमि

2022 का कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का) अधिनियम, 2022, राज्य सरकार द्वारा पारित किया गया था। इस अधिनियम ने कुल आरक्षण को 50% से बढ़ाकर 56% कर दिया, जिसमें एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अतिरिक्त कोटा दिया गया। यह कानून भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में पारित हुआ और 11 जनवरी 2023 को राज्यपाल की मंजूरी के बाद 12 जनवरी को कर्नाटक गजट में प्रकाशित हुआ।

याचिकाएँ और न्यायिक प्रक्रिया

यह फैसला दो याचिकाओं के परिणामस्वरूप आया। पहली याचिका डॉ. आंबेडकर अनुसूचित जाति फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्रा ने दायर की थी। दूसरी याचिका सागर एच आर, प्रज्वल कुमार डी और पुरुषोत्तम गौड़ा ने दायर की थी, जो सभी सिविल इंजीनियरिंग स्नातक हैं और बृहत बंगलूरु महानगर पालिका में सहायक इंजीनियर (सिविल) पद के लिए आवेदन कर रहे थे। इन याचिकाओं ने कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने हाईकोर्ट के फैसले को गंभीर बताया और कहा कि इसका सामाजिक न्याय, शैक्षणिक अवसरों और सार्वजनिक रोजगार पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने न्यायपालिका और संवैधानिक ढांचे का सम्मान करने की बात दोहराई, साथ ही पिछले भाजपा सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से 50% आरक्षण सीमा की व्यापक समीक्षा करने का आग्रह किया और कर्नाटक को नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अपील सहित सभी कानूनी उपायों पर विचार किया जाएगा और वर्तमान भर्ती एवं शैक्षणिक अवसरों को कानून के अनुसार सुरक्षित रखा जाएगा।

आपके लिए संबंधित खबरें

मुख्य बातें

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2022 के आरक्षण अधिनियम को असांविधानिक घोषित किया।
  • आरक्षण को 50% से अधिक बढ़ाना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है।
  • धारा 3 और धारा 4 दोनों को रद्द किया गया।
  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील सहित सभी कानूनी उपायों पर विचार करने का संकेत दिया।
यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *