कर्नाटक में भूजल संकट: 70% से अधिक उपयोग, 227 तालुका सूखाग्रस्त, जलाशयों में पानी घटा
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कर्नाटक में भूजल संसाधनों की स्थिति को लेकर जारी वार्षिक रिपोर्ट ने जल की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में गंभीर गिरावट दर्ज की है। राज्य के 227 तालुका अब सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं, जबकि जलाशयों में पानी की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 35% घट गई है।
भूजल उपयोग में तीव्र वृद्धि
2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में कुल 17.41 बिलियन घन मीटर भूजल उपलब्ध था, जिसमें से 11.58 बिलियन घन मीटर का उपयोग किया गया। इसका मतलब भूजल उपयोग स्तर 66.49% रहा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस साल सूखे की स्थिति जारी रहने से उपयोग 70% की सीमा पार कर सकता है, जो सुरक्षित माना जाता है।
तालुका‑वार उपयोग स्थिति
रिपोर्ट में बताया गया कि 145 तालुका सुरक्षित श्रेणी में हैं, जबकि 36 तालुका में उपयोग 70‑90% के बीच, 11 तालुका में 90‑100% तक पहुंच गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 45 तालुका में उपलब्ध भूजल से अधिक पानी का उपयोग किया जा रहा है।
जलाशयों की घटती क्षमता
कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 14 प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता 895 टीएमसी फीट है, लेकिन वर्तमान में केवल 540 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध है। पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 827 टीएमसी फीट थी, जिससे जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव स्पष्ट होता है।
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भूजल की गुणवत्ता में गिरावट
भूजल के स्तर के गिरने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता भी बिगड़ रही है। रिपोर्ट में 17 तालुका में लवणता, 41 में नाइट्रेट, 15 में फ्लोराइड और 13 में यूरेनियम की मौजूदगी दर्ज की गई। ऐसे दूषित पानी के सेवन से किडनी, लिवर और हड्डियों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी और समाधान
पर्यावरण वैज्ञानिक जीएस श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि उत्तर‑पूर्वी मानसून का योगदान केवल 16% है और इस वर्ष यह अपेक्षित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अत्यधिक भूजल उपयोग के कारण गर्मियों में लाखों बोरवेल सूख सकते हैं।
जल संरक्षण विशेषज्ञ विश्वनाथ श्रीकांतैया ने सुझाव दिया है कि अच्छी बारिश के दौरान पानी का भंडारण किया जाए और सूखे के समय उसका सोच‑समझकर उपयोग किया जाए। उन्होंने अगले जून तक पानी की खपत पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है, जिससे जल बचत के साथ फसल उत्पादन में सुधार संभव हो सके।
मुख्य बातें
- कर्नाटक में 227 तालुका सूखाग्रस्त घोषित।
- भूजल उपयोग 66.49% से 70% से अधिक हो सकता है।
- 14 जलाशयों में उपलब्ध पानी 540 टीएमसी फीट, पिछले साल 827 टीएमसी फीट।
- 45 तालुका में उपलब्ध भूजल से अधिक पानी का उपयोग।
- भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड, यूरेनियम जैसी प्रदूषक मौजूद।
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, जल भंडारण को बढ़ावा देना आवश्यक।




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